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शिक्षा मे आरक्षण (कितना सही कितना गलत )

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youthhhhhhhhhhhhhhhh

शिक्षा मे आरक्षण

वैसे तो कई प्रकार के आरक्षण हमारे सविधान द्वारा लागू किए गए हैं । मैं नहीं जानती की उन्हे किन परिस्थितियों मे और क्यूँ लागू किया गया है । हमारे देश के विकास मे ये कितना सहायक है ये भी में नहीं जानती ,और इससे होने वाले नुकसान से मैं आपको अवगत कराऊँ या इसमे सुधार कराऊँ ऐसा भी होना मुश्किल है ,क्यूकी ना तो मैं कोई समाज सुधारक हूँ और ना ही मैं कोई विशेषज्ञ, जो आरक्षण पर  रिसर्च करने निकली हूँ ।
अभी प्रतियोगी परीक्षाओं के दौरान जो भी मुझे महसूस हुआ वो मैं आप लोगो के सामने रखना चाहती हूँ । जानती हूँ कई लोगों की भावनाओ को मैं अंजाने मे ही ठेस लगाने का कारण बन सकती हूँ । पर मेरी इल्तजा है कृपया इसे प्रेकटिकली लें और इस विषय पर गौर करें …..

आजकल जितनी प्रतियोगी परीक्षाएँ हो रहीं हैं । मसलन जैसे आईआईटी ,aieee सीपीएमटी या जिस भी स्तर पर प्रतियोगी परीक्षाएँ आयोजित की जाती हैं जिससे देश की भावी पीढ़ी का भविष्य तय होता है।उसमे जो कट ऑफ लिस्ट सामने आती है ,वो दिमाग को झन्नाहट से भर देती है,। अभी आप केवल ए आई ईईई का ही उदाहरण लीजिये । जहां साधारण वर्ग (जनरल ) की कट ऑफ लिस्ट 48 रही , वहीं केटेगरी वर्ग (पिछड़ी जातियाँ ) की कट ऑफ लिस्ट 18 रही … कितना अंतर था???

क्या जरूरी है ,साधारण वर्ग (जनरल मे) गरीबी नहीं है???? क्या जरूरी है उन बच्चों को अच्छा माहौल पढ़ने के लिए मिला हो???या उनमे दिमाग केटेगरी वाले बच्चों से ज्यादा हो ???? (क्या प्रकृतिक रूप से ऐसा हो सकता है ,मैं नहीं मानती )

आज के परिदृश्य  मे शिक्षा मे आरक्षण एक बडे असंतोष का कारण ही नहीं अपितु बच्चों के दिमागो मे जहर घोलने का काम भी करता है । जनरल वर्ग का बच्चा बहुत मेहनत करके भी कई बार कई प्रतियोगी परीक्षाओं मे पास नहीं हो पाता ,कारण  जनरल की कट ऑफ लिस्ट ऊंची चली जाती है , जबकि केटेगरी वर्ग के बच्चे थोड़ी सी मेहनत करके इन परीक्षाओं मे पास हो जाते हैं ,क्यूंकी कट ऑफ लिस्ट मे उन्हे आरक्षण मिला !
यही कारण बच्चों मे असंतोष पैदा करता है ,जो पूरे समाज के लिए घातक है । आरक्षण जाती –वर्ण के आधार पर नहीं वरन परिस्थितियों के आधार पर हो ,या सुविधा-या असुविधा के आधार पर हो । (उस पर भी कड़ी निगाह राखी जानी चाहिए ,ताकि किसी भी मासूम बच्चे के भविष्य के साथ कोई खिलवाड़ ना कर सके )

आरक्षण जैसी चीज का इस्तेमाल नेता-अपने -अपने वोट के लिए  या प्रभावशाली लोग अपने फायदे के लिए ज़्यादा करते हैं । इसलिए इस क्षेत्र मे आरक्षण समाप्त करके सबको एक ही द्रष्टि से देखा जाये , हाँ गरीबी के आधार पर इन्सानो को छूट अवश्य मिलनी चाहिए ।
पढ़ाई मे तेज ,बुद्धिमान बच्चों को पढ़ाई की मुफ्त सामाग्री के साथ-साथ शिक्षक भी अच्छे मिलने चाहियेँ। साथ ही उत्तम शिक्षा के लिए अच्छा वातावरण देना भी सरकार का काम होना चाहिए । आरक्षण वर्ग वाले बच्चों मे कोई कम दिमाग नहीं होता (केवल वर्ग के आधार पर )बल्कि हर जगह छूट मिलने की वजह से वो अपनी पूरी प्रतिभा का प्रदर्शन भी नहीं करते ।जिससे उनकी प्रतिभा के साथ ढंग से न्याय भी नहीं हो पाता । ………………. पूनम’मनु’

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30 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
September 13, 2012

मान्या मनु जी, साभिवादन !………..अधिक सुविधा मिलने से आदमी शिथिल हो जाता है | मेरे मतानुसार भी यह बिलकुल गलत है और मैं आप के विचारों से सहमत हूँ ! आलेख प्रभावकारी है | हार्दिक आभार !

jalaluddinkhan के द्वारा
July 12, 2012

मेरा भी यही मानना है की शिक्षा में कोई आरक्षण नहीं होना चाहिए.प्रतिभा चयन में आरक्षण दे कर हम अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मार रहे हैं.आपका एक प्रशंसनीय प्रयास.

chaatak के द्वारा
July 2, 2012

मनु जी, आरक्षण जैसे विषय पर आपकी राय जानकर प्रसन्नता हुई इसी मुखर होकर विरोध करे विजय सत्य की होगी| आरक्षण का जन्म ही गलत नीयत की देन था परिणाम यह हुआ कि ये अपने जन्म के साथ ही प्रतिभाओं को निगलने वाला अजगर बन गई| आज ये राजनीति की बड़ी फसल काटने वाली वह मशीन बन चुकी है जो सार-सार को छोड़कर थोथा बटोर रही है| कारण है दोषपूर्ण संविधान जिसमे एक प्रबुद्ध व्यक्ति के वोट की कीमत भी उतनी ही है जितनी एक जाहिल और आवारा की| इस साहसिक पोस्ट पर हार्दिक बधाई!

ajaykr के द्वारा
July 1, 2012

..मनु जी …..अतीत बड़ा लुभावना होता हैं चाहे वह कड़वा ही क्यों ना रह हों ,संघर्ष की जद्दोजहद,मूल्यों के विखरने की पीड़ा ,बदलाव की आतुर प्रतिक्षाएं बड़ी लुभावनी लगने लगती हैं जब हम कुछ हांसिल कर लेते हैं| आरक्षण जरूरी हैं किन्तु इसका आधार जातिगत ना होकर आर्थिक होना चाहिये ..मेडिकल की पढाई के साथ मैं शिक्षा के भी जुड़ा हूँ .छोटे शहरो,कस्बो में आज के इस प्रतिस्पर्धी माहौल में सही किताबो तक का नहो पता चलता वही दूसरी ओर बड़े घरों के बच्चे कोटा ,कानपुर जाकर कोचिंग करते हैं ,इन परिक्षाओ में एक अंक से परिणाम पर क्या फेरक पड़ता हैं ,आपसे छुपा नही हैं |एक समय था जब इंटर की किताबे पर्याप्त होती थी ,पर आजकल सोलोमन,पाउला ब्रुस ,जेनी मार्च, जे दि ली ,रेज्निक्स हालीडे ,इरोदोव को पढ़ना पड़ता हैं ,स्कूली शिक्षा ,खासकर यू पी बोर्ड का करिकुलम,अध्यापको का नजरिया ,पुस्तके ऐसी हैं की आप चाह कर भी इस बोर्ड की पढाई से IIT/AIEEE/AIPMT जैसी परिक्षाए नही निकाल सकते ,और फिर IIT की परीक्षा का नया फरमान …..|क्या यू पी बोर्ड के बच्चों और आर्थिक रूप कमजोर परिवार के बच्चों के हित में हैं ये बातें ?सरकार को उचित आधार पर आरक्षण देकर ,समाज के सभी तबको के हित में कार्य करना चाहिये ………………… आपका –अजय

    ajaykr के द्वारा
    July 2, 2012

    आपको मेरे ब्लाग पर आमंत्रण हैं http://avchetnmn.jagranjunction.com/2012/07/02/आधुनिक-शिक्षा-का-यह-रूप-भी/

sinsera के द्वारा
June 29, 2012

तोशी जी नमस्कार, एक बहुत ही दुखदायी मुद्दे पर आपने सटीक कलम चलायी है..बुद्धिजीवियों के देश में आरक्षण जैसी शर्मनाक व्यवस्था का होना समझ में नहीं आता..जो लोग इस सुविधा का लाभ ले रहे है उन्हें भी शर्म नहीं आती.. हर महत्वपूर्ण पद पर और शैक्षिक रूप से महत्वपूर्ण सीटों पर आरक्षण जब तक रहेगा तब तक इस देश का भला नही हो सकता..

yogi sarswat के द्वारा
June 28, 2012

अत्यंत सटीक लेखन , तोशी जी !

    मनु (tosi) के द्वारा
    June 28, 2012

    धन्यवाद योगी जी … उत्साहवर्धन के लिए आपकी आभारी हूँ …सादर !!!

Ajay Kumar Dubey के द्वारा
June 28, 2012

पूनम जी नमस्कार, आपके विचारों से सहमत. आरक्षण एक ऐसा मुद्दा है जिसके लाभ का तो पता नहीं, हाँ इसने समाज में विद्वेष फ़ैलाने का काम जरूर किया है. और राजनीतिज्ञों को एक हथियार…

    मनु (tosi) के द्वारा
    June 28, 2012

    जी बिलकुल अजय कुमार जी !आपकी प्रतिक्रिया हेतु दिल से आभारी हूँ …. सादर !!!

akraktale के द्वारा
June 26, 2012

मनु जी सादर नमस्कार, आरक्षण के मूल में जाएँ तो इसको लागू करने के पीछे का कारण यह रहा है की समाज के कई वर्ग अन्य वर्गों से काफी पिछड़े हुए थे क्योंकि उच्च वर्ग द्वारा इनका काफी शोषण किया गया था इनको आगे बढ़ने का अवसर नहीं मिल पाया था. राजनीतिज्ञों ने उनकी इस दुर्दशा को समझा और आरक्षण का फार्मूला अपनाया, किन्तु उसे सही प्रकार से लागू नहीं किया जा सका यह पहली गलती थी दूसरी गलती यह हुई कि निर्धारित समय के पश्चात भी इसके सही परिणामो को प्राप्त नहीं किया जा सका, जब सही लागू ही नहीं हुआ तो अच्छे परिणामो कि आस कैसे रहे. फिर तीसरी गलती जिसको आज देश का एक बड़ा वर्ग भोग रहा है, सिर्फ राजनैतिक स्वार्थ के कारण आरक्षण को बंद नहीं किया गया. जब कि आज कि आवश्यकता है कि आरक्षण को बंद करके पुनः इसकी समीक्षा हो और जहां इसकी जरूरत हो वहीँ इसे लागू किया जाए. गरीबी या जाति के आधार पर इसे लागू करना देश कि प्रतिभाओं के साथ खिलवाड़ ही माना जाएगा.

    मनु (tosi) के द्वारा
    June 28, 2012

    आपकी प्रतिक्रिया हेतु दिल से आभारी हूँ आदरणीय अशोक जी …. धन्यवाद !!!

allrounder के द्वारा
June 25, 2012

नमस्कार मनु जी, आरक्षण एक ऐसा ज्वलंत मुद्दा है हमारे देश मैं जिसपर मनीषी, विशेषज्ञ लगातार मनन करते और अपने विचार रखते रहते हैं, और जिस प्रकार का सामाजिक ढर्रा है हमारे देश मैं उससे इस मुद्दे पर कभी भी एक आम सहमति नहीं बन सकती, जिनको आरक्षण का लाभ मिलता है वे इसके पक्षधर हैं, बाकी इसका विरोध करते हैं, और इस पर जमकर राजनीती होती है दरअसल क्या जरुरत है किसको जरुरत है आरक्षण की इस पर ईमानदारी से समीक्षा की ही नहीं जाती मेरे विचार से !

    मनु (tosi) के द्वारा
    June 28, 2012

    जी आपने बिलकुल ठीक कहा सचिन जी !!! इस पर ईमानदारी से समीक्षा कि जरूरत है …… प्रतिक्रिया हेतु धन्यवाद … सादर

Mohinder Kumar के द्वारा
June 25, 2012

पूनम जी, हम आपके विचारों से सहमत हैं कि आवश्यकता अनुसार ही आरक्षण दिया जाना चाहिये…. शिक्षा में आरक्षण से भी अधिक गंभीर जो मुद्दा है वह है शिक्षा का व्यवसायीकरण. कुकर्मुत्तों की तरह उगते शिक्षा के उद्योग, मंहगी होती शिक्षा और नौकरियों की गिरती संख्या इस देश को कहां ले जायेगी इसके बारे में कोई नहीं सोच रहा है.

    मनु (tosi) के द्वारा
    June 28, 2012

    आदरणीय मोहिंदर जी आपकी प्रतिक्रिया हेतु आभारी हूँ ….. धन्यवाद !!!

Bhupesh Kumar Rai के द्वारा
June 25, 2012

मनु जी , आरक्षण को हमारे नेताओं ने पैदाईशी हक़ की शक्ल दे दी है.ये सुविधा अब कई प्रतिभाशाली लोगों के लिए मार्ग अवरोधक हो गई है. आप की इस बात से मैं सहमत हूँ कि आर्थिक आधार पर वंचितों को शिक्षा में यथसंभव सुविधाएँ दी जाना चाहिए, जिससे हर किसी को अपनी प्रतिभा दिखाने का समान अवसर मिल सके.

    मनु (tosi) के द्वारा
    June 28, 2012

    आदरणीय भूपेश जी आप पहली बार मेरी वाल (ब्लॉग ) पर आए आपका अभिनंदन करती हूँ … आपकी प्रतिक्रिया हेतु दिल से आभारी हूँ …………….. सादर धन्यवाद !!!!

vikramjitsingh के द्वारा
June 25, 2012

पूनम जी नमस्कार….. आरक्षण चाहे पढाई में हो या नौकरी या तरक्की में…..हमेशा ही इस देश के लिए असुविधाजनक ही रहा है……इस आरक्षण की वजह से कई बार काबिल इंसानों को सही मौका प्राप्त नहीं हो पाता…जबकि आरक्षित कोटे में चाहे कोई डिप्टी कमिश्नर ही क्यों ना हो….उसके बच्चों को आरक्षण का फायदा मिलेगा…लेकिन एक जनरल कोटे में चाहे कोई रिक्शा ही चला रहा हो…….लेकिन उसके बच्चों को देने के लिए पढाई के साथ-साथ नौकरी भी इस देश में आसान नहीं है….. विचारणीय आलेख…..

    मनु (tosi) के द्वारा
    June 28, 2012

    यही तो परेशानी का सबब है मेरी !!! विक्रम जीत जी !!! यही मैं भी कहना चाहती हूँ … ये नाइंसाफी क्यूँ ,,, बच्चे सब समान हैं ॥ उनमे जहर भरता है ये आरक्षण …. आपकी प्रतिक्रिया हेतु आभारी हूँ …सादर धन्यवाद ….!!!

Chandan rai के द्वारा
June 25, 2012

पूनम जी , सर्वप्रथम यदि पिछले ५० दशक पीछे जन्म लेती तो आप सायद सामाजिक जातिवाद के आधार पर भेदभाव देखकर दम तोड़ देती ,जिसका छिटपुट चित्रं आप पुराने साहित्यकारों की रचना में देख सकती है , या अभी भी आप भारत के अनयन पिछड़े गाँव में जाए और देखे उस जातिगत व्यवहार को ! और दूसरी बात हमे ढर्रे पर चलने की आदत है ,हो सकता है की आज के सामाजिक परिवेश के फिर से आकलन की जरुरत आ गई है ,इक नए फार्मूले की , क्यूंकि अब स्थिति इतनी भयावह नहीं है

    मनु (tosi) के द्वारा
    June 28, 2012

    जी हाँ चन्दन जी। सादर!! वाकई अब आंकलन कि जरूरत आ गयी है … आपकी प्रतिक्रिया के लिए दिल से आभारी हूँ ….. धन्यवाद !!!

jlsingh के द्वारा
June 25, 2012

पूनम जी, नमस्कार! आरक्षण आज बहुत ही विवादित विषय हो गया है जिसे नेता लोग अपनी अपनी सुविधा के लिए या कहें की वोट की राजनीती के लिए इस्तेमाल करते हैं …… दरअसल सबको सामान अवसर मुहैया करने की जरूरत है ताकि पिछड़े या गरीब तबके के लोग भी आगे बढ़ सकें …

    मनु (tosi) के द्वारा
    June 28, 2012

    आदरणीय जवाहर भाई जी आप से मैं सहमत हूँ … आपकी प्रतिक्रिया हेतु आपको धन्यवाद कहती हूँ …. सादर !!

dineshaastik के द्वारा
June 25, 2012

पूनम जी बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति। मुझे लगता है कि यदि यह आरक्षण  और अधिक  समय तक  रहा तो सामान्य श्रेणी के लोग  बहुत  अधिक  पिछड़ जायेंगे, और  फिर  इनको आरक्षण   की जरूरत  पढ़ेगी।

    मनु (tosi) के द्वारा
    June 28, 2012

    आदरणीय दिनेश जी , सादर नमस्कार !! आप ठीक कह रहे हैं …. पर मुझे लगता है …. सभी वर्गों के बच्चों को एक ही नज़र से देखना चाहिए …. आपकी प्रतिक्रिया हेतु धन्यवाद !!!

seemakanwal के द्वारा
June 24, 2012

ये बात तो सही है विद्यार्थी चाहे जिस जाति का हो अगर वो प्रतिभाशाली है तो उसे सहायता मिलनी चाहिए .

    मनु (tosi) के द्वारा
    June 28, 2012

    जी बिलकुल !! सीमा जी … आपका ,मेरे ब्लॉग पर स्वागत है … आपकी अमूलय प्रतिक्रिया के लिए मैं दिल से आभारी हूँ । सादर धन्यवाद !!!

jagojagobharat के द्वारा
June 24, 2012

जिस देश की प्रतिभा का लोहा विदेशी भी मानते थे आज आरक्ष की वजह से वो उन प्रतिभा शाली युवाओ को मौका ही नहीं मिल पा रहा है .आप के द्वारा उठाये गए मुद्दे की मै तहेदिल से प्रसंशा करता हु बहुत ही sundar आलेख

    मनु (tosi) के द्वारा
    June 28, 2012

    आदरणीय राजेश जी आपको अपने ब्लॉग पर देख बहुत प्रसन्नता हो रही है … जी आपने ठीक कहा !!! आपकी प्रतिक्रिया के लिए दिल से आभारी हूँ … सादर !!!


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