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****पापा के नाम ख़त ****

Posted On 17 Jun, 2012 Others, मेट्रो लाइफ में

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papa

आठ साल की थी तब मैं जब मेरे पिताजी का हार्ट –अटैक के कारण अल्पायु मे ही स्वर्गवास हो गया था। अक्सर पापा के लिए रोती मैं उन्हे ख़त लिखती थी । एक दिन माँ ने जब मेरे लिखे ख़त पढे तो वो मुझे कलेजे से चिपटा कर बहुत रोई। मैंने अपने हाथों से उनके आँसू पोंछे और उनसे मासूमियत से पूछा,” माँ मैं ये ख़त पापा के पास पहुंचाना चाहती हूँ । कैसे पहुंचाऊ ?” माँ ने कहा एक काम करो जो नदी हमारे खेत के किनारे से होकर बह रही है वो स्वर्ग तक जाती है, उसमे हर ख़त की कश्ती बनाकर बहा देना तुम्हारा ख़त तुम्हारे पापा के पास पहुँच जाएगा । और जब तक मैं खुद समझदार नहीं हो गई ।मैं अपने ख़त इसी तरह नदी मे प्रवाहित करती रही। उनमे जो अक्सर मज़मून होता था वो इस तरह का होता था । मुझे आज भी अपने पापा की याद इसी तरह आती है ॥ और अब माँ भी उनही के पास चली गई हैं । शायद मेरा दुख उन्हे बताने ………….

आठ साल की बच्ची के ख़त
उसके स्वर्गीय पापा के नाम

जिनको अक्सर प्रवाह देना
एक नदिया का काम …

“पापा तुम बिन लगे सब सूना
माँ रोती है दूना-दूना
मैं तो कुछ खा भी,लेती हूँ
माँ का तो अक्सर व्रत ही होना
एक-एक पैसे की खातिर माँ
करे काम दिन –दिन चौगुना
उषा के पापा ,सुमन के पापा
बस एक ही न पूनम के पापा
तुम कहाँ हो, लौट भी आओ अब
मैं ताकती राह बारहों-महिना
भईया मुझको मारे है
मामा न पुचकारे है
जब भी, माँ से भईया पैसे लेते
माँ के नैना चुप-चुप रोते
मुझसे अब देखा न जाता
रोटी ,कपड़ा कुछ न भाता
हमको भी संग ले जाओ ना
अब पापा तुम आ जाओ ना “

नन्ही सी गुड़िया रोज़ ही  बिलखी

अनगिन  सुबहो – शाम

आठ साल की बच्ची के ख़त
उसके स्वर्गीय पापा के नाम …. पूनम ‘मनु’

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32 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Himanshu Nirbhay के द्वारा
August 31, 2012

मनु, आपकी भावनाओ के मर्म को समझ सकता हूँ| ज्यादा कुछ व्यक्त नहीं कर सकता… एक बेटी का अपने पिता से सर्वथा अधिक लगाव होता है…. प्रार्थना है परमपिता से कि आप खुश रहें|

jalaluddinkhan के द्वारा
July 12, 2012

एक मर्मस्पर्शी रचना,जो हर उस बच्चे का दर्द बयां करती है,जो बहुत ही कम समय में अपने माता या पिता को खो देते है.यह कविता ऐसे बच्चों की मनोदशा को बेहद अच्छी तरह व्यक्त करती है.बचपन में जो खो जाता है,उसे हासिल नहीं किया जा सकता है.ईश्वर आप को उसका ऐसा बदल दे.जो उन कठोर पलों को भूलने में आपकी मदद करे.

RAJEEV KUMAR JHA के द्वारा
June 20, 2012

मनु जी,सादर.आपने अपने पिता को याद करते हुए बहुत ही भावुकतापूर्ण कविता लिखी है.सच में, बालमन होता ही ऐसा है. ईश्वर उनकी आत्मा को शांति दे.

    मनु (tosi) के द्वारा
    June 23, 2012

    धन्यवाद आदरणीय राजीव जी !!!सादर

mparveen के द्वारा
June 18, 2012

अति भावुक रचना मनु जी ….. भगवन उनकी आत्मा को शांति दे ..

    मनु (tosi) के द्वारा
    June 23, 2012

    धन्यवाद परवीन जी !!! सादर ……….

yogi sarswat के द्वारा
June 18, 2012

पिता , एक ऐसा नाम जिसकी छाया के नीचे सब कुछ अच्छा लगता है ! अगर वो छायादार हाथ , सर से उठ जाए तो जीवन में जो खालीपन आ जाता है उसे भर पाना आसान नही होता ! आपकी व्यथा , आपके लिखे शब्द बयान करते हैं ! ज्यादा नहीं लिखूंगा ! बस इतना ही कि भगवान् आपको और आपके परिवार को हमेशा सुखी रखे ! जिससे आपके वालिदेन जब भी आपको ऊपर से देखें तो वो भी आपकी ख़ुशी में खुश हो सकें !

    मनु (tosi) के द्वारा
    June 23, 2012

    आदरणीय योगी जी , सादर नमस्कार … आपने सच कहा पिता के बिना कितना असुरक्षित महसूस करती हूँ मैं आज भी …. !!!

sonam के द्वारा
June 18, 2012

हेलो पूनम दी कुछ भी कहने में असमर्थ हूँ ! बस आप खुश रहिये!

    मनु (tosi) के द्वारा
    June 23, 2012

    हाँ सोनम एक छोटी सी बहन पा कर मैं खुश हूँ … प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद !!!

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
June 18, 2012

स्नेही मनु जी, शुभाशीष इसके आलावा मैं क्या दे सकता हूँ आप को.

    मनु (tosi) के द्वारा
    June 23, 2012

    आपका आशीर्वाद बहुत है मेरे लिए …बस इसी कि ज़रूरत थी आपकी आभारी हूँ कुशवाह सर जी सादर धन्यवाद !!!!

jlsingh के द्वारा
June 18, 2012

आदरनीय पूनम जी, सादर अभिवादन! बहुत दुःख हुआ आपके बारे में जानकार! एक आठ साल की बच्ची की मनोदशा का वर्णन जो आपने किया है निहायत ही कारुणिक है. भगवान् आपको मजबूत और ताकतवर बनाये रखें यही दुआ करता हूँ! आपके ख़त भले ही नदी में बह गए हो पर आपके मन की भावनाओं को आपके पापा ने अपनी आत्मा से जरुर महसूस किया होगा |पिता की याद में लिखी गयी हृदय-स्पर्शी रचना |

    मनु (tosi) के द्वारा
    June 23, 2012

    धन्यवाद जवाहर भाई जी , सादर !! आप सबका साथ मुझे तसल्ली प्रदान करता है कि मैं अकेली नहीं हूँ …. धन्यवाद …….

चन्दन राय के द्वारा
June 18, 2012

पूनम जी , पिता की छाया हर बच्चे की प्रहरी की तरह होती है , भगवान् ने आपको वो अनमोल पितृ स्नेह कम समय के लिए बख्शा सुनकर अंतस दुखी हुआ , आपकी कविता पढ़ सायद भगवान् का करेजा भी फट गया होगा अपने उस कुकृत्य पर ,

    मनु (tosi) के द्वारा
    June 23, 2012

    आदरणीय चन्दन जी !!!नमस्कार , प्रतिक्रिया हेतु धन्यवाद !!!मेरे गम मे शरीक होने के लिए आपकी आभारी हूँ !!!

dineshaastik के द्वारा
June 17, 2012

पूनम जी बहुत  ही मार्मिक  पत्र, हृदय दृवित  कर गया। मेरे पिता का स्वर्गवास  उस  समय  हो गया था जब  मुझे उनकी सबसे ज्यादा जरूरत थी। मेरे आस्तिक   होने का एक  कारण  यह भी है। आपकी यह रचना मेरे आँसू बहने से नहीं रोक  सकी।

    मनु (tosi) के द्वारा
    June 23, 2012

    आभारी हूँ आपकी आदरणीय दिनेश जी !!! आप मेरे गम मे शरीक हुये …सादर धन्यवाद !!!

Punita Jain के द्वारा
June 17, 2012

आपके ख़त भले ही नदी में बह गए हो पर आपके मन की भावनाओं को आपके पापा ने अपनी आत्मा से जरुर महसूस किया होगा |पिता की याद में लिखी गयी हृदय-स्पर्शी रचना |

    मनु (tosi) के द्वारा
    June 23, 2012

    जी पुनिता जी ! आपका मेरे ब्लॉग पर स्वागत है पुनिता जी !! सादर धन्यवाद !!!

akraktale के द्वारा
June 17, 2012

मनु जी सादर, पोस्ट के साथ लगे चित्र के साथ यह ख़त सीधे दिल तक पहुंचता है. बहुत ही भावुक कर देने वाली सुन्दर रचना. मंच की श्रेष्ठ कृतियों में से एक. बधाई.

    मनु (tosi) के द्वारा
    June 23, 2012

    धन्यवाद अशोक जी !!!सादर …………..

Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
June 17, 2012

मान्या मनु जी, सादर ! भाव-विभोर कर देने वाली रचना | बहुत-बहुत बधाई !

    मनु (tosi) के द्वारा
    June 23, 2012

    धन्यवाद विजय गुंजन जी … सादर !!!

Santosh Kumar के द्वारा
June 17, 2012

आदरणीय पूनम बहन ,…बहुत भावुक करता पापा के नाम आपका ख़त ,..निःशब्द हूँ ..

    मनु (tosi) के द्वारा
    June 23, 2012

    धन्यवाद संतोष भाई जी !!आपको अपने ब्लॉग पर देख कर बहुत खुश हूँ !सादर !!

अजय कुमार झा के द्वारा
June 17, 2012

बेहद भावुक करने वाला और दिल को छू लेने वाला खत ।

    मनु (tosi) के द्वारा
    June 23, 2012

    धन्यवाद अजय जी !!!

Rajkamal Sharma के द्वारा
June 17, 2012

जागरण के फीडबैक पर तो आप के अनेको खत देखे है लेकिन यह खत उन सभी से बिलकुल जुदा है काश वहां पर भी इसी अंदाज़ में लिखा होता तो आज आप जरूर अखबार में छप गई होती http://krishnabhardwaj.jagranjunction.com/2012/06/17/%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%B0%E0%A5%87-%E0%A4%AA%E0%A4%BE%E0%A4%AA%E0%A4%BE-%E0%A4%95%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%A4%E0%A4%BE/

    मनु (tosi) के द्वारा
    June 19, 2012

    नमस्कार आदरणीय राजकमल सरजी !!!आपको अपने ब्लॉग पर देख कर और आपकी प्रतिक्रिया देखकर मन गद -गद हो गया …धन्यवाद आपका !!!

minujha के द्वारा
June 17, 2012

पूनम  जी ह्रदय  को स्पर्श  करती भावनाएं ……,ज्यादा  कह पाने में खुद को असमर्थ  पाती हुं…

    मनु (tosi) के द्वारा
    June 19, 2012

    धन्यवाद मीनू जी !!! आभार !!!


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