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पागल

Posted On: 29 May, 2012 Others में

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पागल
~~~~~~~~~~~~~~~

आगे-पीछे दायें-बाएँ
सब छोटे –बड़े पुरुष
उसे छेड़े जाते ~~~~
और वह कठपुतली
सी बेबस नाचती
बचती बचाती
ज़ोर –ज़ोर से चिल्लाती
पर……
संवेदनाओं से खाली मन
उसे देख, उसे छेड़
दिल में प्रफुलित हो
उसकी हंसी उड़ाते…..
जो रात के अंधेरे में
उसे ना पा पाते
वो प्रोढ़ ,वो बूढ़े
दिन के उजाले में
किशोर लड़को से
बचाने की कोशिश का ढोंग कर
उसके नाज़ुक हिस्सों पर
दबाव बनाते….
और उनकी वासना के लाल डोरे
तब ……..
किसी से भी न छुपते-छुपाते
इसी नशे में सब उसे
आगे बढ़ खूब सताते ….
और वो………….
उनसे छूटने की
नाकाम कोशिश में
खुद पर झल्लाती
इस बेबसी में रोकर
जब भी वो किसी पर
पत्थर उठाती….
तो वो ही भीड़
उसे पागल कह
उसके पीछे दौड़ लगाती
कहते सब पागल उसको
क्यूंकी
दो रोटी में
वो…..
उनकी प्यास बुझाकर
इस दुनिया की भीड़
बढ़ाती ……..पूनम ‘मनु’

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45 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Madan Mohan saxena के द्वारा
December 7, 2012

ख्याल बहुत सुन्दर है और निभाया भी है आपने उस हेतु बधाई, सादर वन्दे,,,,,,

yamunapathak के द्वारा
June 6, 2012

कटु सत्य मनु,प्लेटफोर्म,सड़क या इधर-उधर घुमती ऐसी बेबसी का भयानक अंजाम समाज का स्याह पहलु है. उनकी मानसिक विकृति इस पागल से ज्यादा विभस्त है,

    मनु (tosi) के द्वारा
    June 14, 2012

    जी हाँ यमुना जी !!! सही कह रहीं हैं आप धन्यवाद !!!

RAJEEV KUMAR JHA के द्वारा
June 5, 2012

बहुत अच्छी और संवेदना को जगाती कविता,मनु जी.

    मनु (tosi) के द्वारा
    June 14, 2012

    धन्यवाद राजीव जी !!!

ajaykr के द्वारा
June 5, 2012

बहुत ही मार्मिक कविता……………..आज के समय में………लोग सवेंदना रहित होते जा रहें हैं ..मिडिया ,समाज ,स्कूल सब आज किसी ना किसी तरह से लोगों के पतन के लिए जिम्मेदार हैं उच्च ……आई क्यू ,एस क्यू ,एवं ई क्यू वालो को ही शिक्षक नियुक्त करना चाहिये ,जिन लोगों का खुद का चरित्र और पैमाना नही वो दूसरों को क्या दे सकते हैं ,,,,,,,………….मिटती जा रही हैं ……अंतर्मन से मनुष्यता ,इसीलिए लन्दन के एक चिडियाघर में एक शीशा लगा हैं ,जिसके नीचे एक तख्ती में लिखा हैं ……आप दुनिया के सबसे खतरनाक जानवर को देख रहें हैं …………….

    मनु (tosi) के द्वारा
    June 14, 2012

    धन्यवाद अजय कुमार जी सच कहा आपने !!!

yogi sarswat के द्वारा
June 1, 2012

आदरणीय तोशी जी , सादर नमस्कार ! मैं नहीं समझ पाया की आप इतनी प्रतिभाशाली हैं ! संवेदनायें मर गयी हैं , आज के इंसान की ! ये जो आपने बयान किया है सच में , समाज की असलियत है जिसे हमने और आपने देखा है ! मैं आज आपकी इस रचना पर , मेरे दिल में जितना आपके लिए सम्मान है वो सब उड़ेल देना चाहता हूँ किन्तु बुखार इतना ज्यादा है की लिखने में उंगलियाँ कांप रही हैं ! आपका ये ब्लॉग मैंने कल ही पढ़ लिया था किन्तु बुखार की वज़ह से ही कल आपको कमेन्ट नहीं दे पाया , क्षमा चाहता हूँ ! असल में होता क्या है की जो समाज के ठेकेदार , या अपने आप को मोहल्ले का सरदार समझने वाले सिर्फ अपनी बहन बेटियों को तो समझते हैं की कोई उन्हें बुरी नज़र से भी न देख पाए किन्तु दूसरी कोई लड़की या महिला ( पागल ही सही ) उन्हें एक उपयोगी वास्तु लगती है ! बहुत बहुत सुन्दर रचना ! आदरणीय तोशी जी , अगर मेरे किसी शब्द या शैली से सहमत न हों तो कृपया अन्यथा मत लीजियेगा !

    मनु (tosi) के द्वारा
    June 3, 2012

    आदरणीय योगी जी ! सादर नमस्ते ! योगी जी मैं आपके इस सम्मान का सम्मान करती हूँ ,, और आपका सच्चे दिल से शुक्रिया अदा करती हूँ की ज्यादा बुखार मे भी आपने अपनी प्रतिक्रिया दी … सच योगी जी आप बेहतरीन रचनाकार और लेखक तो हैं ही एक अच्छे इंसान भी हैं ॥ आपको बारम्बार धन्यवाद !!!

rekhafbd के द्वारा
May 30, 2012

मनु जी ,समाज का एक कटु और विभीत्स सत्य दर्शाती हुयी मार्मिक कविता ,बढ़िया प्रस्तुति,बधाई

    मनु (tosi) के द्वारा
    June 3, 2012

    धन्यवाद रेखा जी !!

vikramjitsingh के द्वारा
May 30, 2012

एक घिनौना सच……..

    मनु (tosi) के द्वारा
    June 3, 2012

    धन्यवाद विक्रम जीत जी !!!

pawansrivastava के द्वारा
May 30, 2012

मनु जी नारी के शोषण की बहुत हीन दर्दनाक अभिव्यक्ति

    मनु (tosi) के द्वारा
    June 3, 2012

    आपका स्वागत है … सादर …….. पवन जी धन्यवाद आपकी प्रतिक्रिया हेतु !!!

alkargupta1 के द्वारा
May 30, 2012

पुरुषों के इस घृणित रूप को बहुत ही मार्मिक अभिव्यक्ति दी है …. समाज के कटु सत्य को दर्शाया है…..संवेदनशील रचना के लिए बधाई !

    मनु (tosi) के द्वारा
    June 3, 2012

    आदरणीया अलकाजी , सादर नमस्कार ! आपका दिल से शुक्रिया अदा करती हूँ की मैं आपकी वाल पर कम ही पहुँच पाती हूँ , और माफी मांगती ॥ पर आप हमेशा मेरे ब्लॉग पर मेरी रचना पर अपनी प्रतिक्रिया देकर मेरा उत्साह बढ़ाती हैं आपको मेरा नमन !!!

आर.एन. शाही के द्वारा
May 30, 2012

इतनी गहराई तक पहुँच पाना किसी अत्यधिक संवेदनशील दिमाग की ही उपज हो सकती है. बधाई !

    मनु (tosi) के द्वारा
    June 3, 2012

    धन्यवाद शाही जी !!

Mohinder Kumar के द्वारा
May 30, 2012

तोशी जी, समाज के काले पक्ष को उजागर करती एक दारूण व मार्मिक रचना. लिखते रहिये.

    मनु (tosi) के द्वारा
    June 3, 2012

    आपका मेरे ब्लॉग पर स्वागत है मोहिंदर जी ! आपकी प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद !!!

Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
May 30, 2012

बड़ी संवेदनशील रचना ! समाज की संवेदनहीनता और बीभत्सता का सही चित्रण ! मनु जी,….बधाई !

    मनु (tosi) के द्वारा
    June 3, 2012

    धन्यवाद विजय जी !आपको रचना अच्छी लगी मेरी मेहनत सफल हो गई …. सादर !!!

VIVEK KUMAR SINGH के द्वारा
May 30, 2012

एक बेहतरीन मार्मिक प्रस्तुति | नमस्कार |

    मनु (tosi) के द्वारा
    June 3, 2012

    धन्यवाद विवेक जी आप पहली बार मेरे ब्लॉग पर आए आपका अभिनंदन करती हूँ … सादर

ajay kumar pandey के द्वारा
May 30, 2012

आदरणीय तोशी जी नमन यह कविता बहुत बढ़िया लगी बढ़िया व्यंग्य कसा है पागल पर लिखते रहिये अच्छी कविता कृपया मेरे ब्लॉग पर अनमोल रत्न जल का महत्व और उसको बचाने के रास्ते जरुर देखिएगा धन्यवाद

    मनु (tosi) के द्वारा
    June 3, 2012

    धन्यवाद अजय जी !आपके ब्लॉग पर बिलकुल पहुँचूँगी ….

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
May 30, 2012

मनु जी, सस्नेह समाज का वास्तविक चित्रण सुन्दर शब्दों में. कुछ कहना व्यर्थ ही है. बधाई.

    मनु (tosi) के द्वारा
    June 3, 2012

    आदरणीय सर जी (प्रदीप कुशवाह) आप जो भी कहेंगे सब मंजूर है मुझे … ब्लॉग पर आकर अपना स्नेह यूं ही बरसाते रहें ॥आपको रचना अच्छी लगी मेहनत सफल हुई ॥ आभारी हूँ आपकी…….. धन्यवाद

akraktale के द्वारा
May 30, 2012

मनु जी सादर नमस्कार, कामान्ध पुरुषों के घ्रणित कृत्य और वासना के निम्नतम स्तर पर संतुलित भाषा शब्दों में लिखी गयी उत्कृष्ट रचना के लिए और संभ्रांत कहे जाने वाले मानव समूह के बीच होती घ्रणित घटनाओं को उजागर करने के लिए आप बधाई की पात्र हैं.

    मनु (tosi) के द्वारा
    June 3, 2012

    अशोक जी सादर नमस्कार ! आपकी प्रतिक्रिया के लिए आभार व्यक्त करती हूँ की आपको ये रचना पसंद आई । धन्यवाद !!!

May 30, 2012

अनछुआ विषय और इस समस्या को उठाने के लिए हार्दिक आभार………………………..!

nishamittal के द्वारा
May 30, 2012

कटु सत्य ,मार्मिक प्रस्तुति पूनम जी.

    मनु (tosi) के द्वारा
    June 3, 2012

    धन्यवाद मेम (निशा जी )

jlsingh के द्वारा
May 30, 2012

पूनम जी, नमस्कार! वेदना युक्त अभिब्यक्ति जो एक क्रूर सच्चाई है, कैसे इसे रोका जा सकता है, यह तो एक गंभीर सामाजिक बुराई है!

    मनु (tosi) के द्वारा
    June 2, 2012

    धन्यवाद जवाहर भाई जी !!

anoop pandey के द्वारा
May 30, 2012

मर्मस्पर्शी कविता पूनम जी………..इसी विषय पर बहुत पहले हमें भी एक ब्लॉग लिखा था ‘ रेलवे के बच्चे’ पर आपका कहने का तरीका हमसे लाख गुना बेहतर है. बधाई.

    मनु (tosi) के द्वारा
    June 2, 2012

    धन्यवाद आदरणीय अनूप जी आपको अपने ब्लॉग पर देख बहुत ही प्रसन्नता हुई !कृपया अपना सहयोग यू ही बनाए रखिएगा !! सादर…………………………..

dineshaastik के द्वारा
May 30, 2012

इसी नशे में सब उसे आगे बढ़ खूब सताते …. और वो…………. उनसे छूटने की नाकाम कोशिश में खुद पर झल्लाती इस बेबसी में रोकर जब भी वो किसी पर पत्थर उठाती…. तो वो ही भीड़ उसे पागल कह उसके पीछे दौड़ लगाती कहते सब पागल उसको क्यूंकी दो रोटी में वो….. उनकी प्यास बुझाकर इस दुनिया की भीड़ बढ़ाती ……..पूनम जी बहुत ही भावपूर्ण  प्रस्तुति के लिये बधाई….

    मनु (tosi) के द्वारा
    June 2, 2012

    आदरणीय दिनेश जी धन्यवाद !!!सादर

चन्दन राय के द्वारा
May 29, 2012

मनु जी , जब भी वो किसी पर पत्थर उठाती…. तो वो ही भीड़ उसे पागल कह उसके पीछे दौड़ लगाती कहते सब पागल उसको क्यूंकी दो रोटी में वो….. बेबसी से भरी पागल मन की पीड़ा को सलीके से कहती पंक्तियाँ ,

    मनु (tosi) के द्वारा
    June 2, 2012

    आपका आभार चन्दन जी !कि आपको ये पंक्तियाँ पसंद आई धन्यवाद !!!

Mohd Haneef "Ankur" के द्वारा
May 29, 2012

मनु जी, सादर- बेबसी और मासूमियत का दुरपयोग करने वालों के गाल पर करारा तमाचा . मेरे ब्लॉग पर आप महिला उत्पीडन की रचना जरुर पदियेगा. आपके विचारों से मिलती जुलती.

    मनु (tosi) के द्वारा
    June 2, 2012

    नमस्कार अंकुर जी !मैं आपके ब्लॉग पर जरूर पहुँचूँगी !! आपकी उत्साहित करने वाली प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद !!1


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