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****माँ ****

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mother aaaaaaaaaaaaaaaaaaaa

आज मेरी माँ नहीं है । इसलिए मेरी आँख माँ शब्द से ही नम हो जाती हैं । यूं लगता है जैसे मुझसे ज़्यादा कोई गरीब नहीं। ये कविता मैंने उस वक़्त लिखी थी जब वो मेरे पास थी। ये आज उनके लिए मेरी श्रद्धांजलि है । मैं शुक्रगुजार हूँ जेजे की जिसने हमे माँ के साथ बिताए पलों को फिर से जीने का मौका दिया और एक दूसरे के साथ सांझा करने का मौका दिया … थोड़ा कठिन तो होता है बिन माँ के मुसकुराना तब तो और जब वो हमें कही दिखाई न दे … सूना अंगना, सूना घर ये अहसास और गहरा देते हैं कि आप अब अकेले हैं ।

****माँ*****
___________________

जीवन की थकान से
जब बोझल हुई पलकें मेरी
गम से भरपूर
जब मन मेरा तड़प उठा
जब जिम्मेदारियाँ संभालते
मैं निढाल हुई
किसी नेह की बरसात को
तब मेरा मन तरस उठा ॥

तब !तब! आँखें ढूंढ रही थी
किसी मेरे अपने को
जो रोते मन को सुकून दे
किसी ऐसे सपने को ।।

मैंने अपने साथी को
इसी उम्मीद से निहारा
मगर कुछ दुख अपनी पलकों में
फिर बंद कर लिए
मैंने अपने बच्चों को भी
इसी हसरत से पुकारा
पर उन्होने भी बयान अपने
सवाल चंद कर दिये ॥

पर जिन अपनों से ही शिकायत हो
उनसे कैसे कहें अपनी बात
जो ‘सपने’ चुभते हो पलकों में
उन्हे कैसे लगाएँ हाथ ॥

मैंने हर तरफ इस उम्मीद से देखा
कहीं तो कोई मेरा होगा
जिससे कह सकूँ मैं हर बात
पोंछ मेरे आँसू
जो रो लेगा मेरे साथ ॥

हिम्मत वाली थी मैं पर
हौसला अब टूटने वाला था
ज़िंदगी का साथ भी जैसे
बस छूटने वाला था ॥

पलकें बंद की कि
क्या छोडू क्या पाऊँ
मैं किसी को क्यूँ
अपनी बातें समझाऊँ॥

बंद आँखों में तभी
एक अपना दिखाई दिया
मुझे मेरी माँ का
सपना दिखाई दिया ॥
दौड़ कर जा पहुँची
अपनी माँ के पास
उसने एक मौन के साथ
फेरा सिर पर हाथ ॥

अश्रु एक निकला मेरा
जा गिरा माँ की गोद में
बिना पुछे ही माँ को
जैसे सब हो गया एहसास॥

अश्रु पोछे उसने मेरे
मुझको गले लगाया
धन्यवाद किया मैंने तभी प्रभु का
जिसने माँ को बनाया ॥ …. पूनम ‘मनु’

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40 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

yogi sarswat के द्वारा
May 18, 2012

ज़िंदगी का साथ भी जैसे बस छूटने वाला था ॥ पलकें बंद की कि क्या छोडू क्या पाऊँ मैं किसी को क्यूँ अपनी बातें समझाऊँ॥ बंद आँखों में तभी एक अपना दिखाई दिया मुझे मेरी माँ का सपना दिखाई दिया ॥ दौड़ कर जा पहुँची अपनी माँ के पास उसने एक मौन के साथ फेरा सिर पर हाथ ॥ अश्रु एक निकला मेरा जा गिरा माँ की गोद में बिना पुछे ही माँ को जैसे सब हो गया एहसास॥ लेकिन आदरणीय तोशी जी , सादर नमस्कार ! ना मालुम कैसे आपकी ये रचना मेरी से छूट गई ! देरी से इस पोस्ट पर आने के लिए क्षमा चाहता हूँ ! माँ , मुझे लगता है एक व्यक्ति होने से ज्यादा एक एहसास है , एक परिणति है अपने ख्वाबों की ! एक शक्ति है , एक संबल है , एक माध्यम भी है अपने सपनो को हकीकत में बालने की एक सीढ़ी भी है ! माँ , जैसे नाम में ही ईश्वर नज़र आता है ! माँ की परछाईं हम में होती है ! अगर आप ध्यान से देखें तो किसी बच्चे में ( विशेषकर लड़कियों में मतलब बहनों में ) माँ का अक्स दीखता है ! बहुत बेहतर !

    मनु (tosi) के द्वारा
    May 18, 2012

    आदरणीय योगी जी , सादर नमस्कार ! योगी जी मैं आपसे सहमत हूँ !और क्षमा मांगने की जरूरत कतई नहीं मुझे मालूम था की आप जरूर आएंगे … धन्यवाद आपका

JJ Blog के द्वारा
May 15, 2012

आदरणीय मनु जी आपका ब्लॉग “नेह की बरसात” नाम से दिनॉक15 मई 2012 को दैनिक जागरण के संपादकीय पृष्ठ पर प्रकाशित हुआ है. इस हेतु आपके पास सूचना आपकी मेल आई डी पर भेजी जा चुकी है. मंच की तरफ से आपको हार्दिक बधाइयां धन्यवाद जागरण जंक्शन परिवार

    मनु (tosi) के द्वारा
    May 18, 2012

    धन्यवाद मेरे प्यारे जेजे आपकी दिल से आभारी हूँ !!!

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
May 15, 2012

snehi manu ji, sadar maan ka sthan koi nahi le sakta sara pyar bachhon ko de dalti hai. badhai

    मनु (tosi) के द्वारा
    May 18, 2012

    आदरणीय सर जी !बहुत दिनो बाद दिखाई दिये मुझे आप ।लगा कहीं खफा तो नहीं !!! पर आपका आना सचमुच अच्छा लगा मुझे !धन्यवाद !!!

dineshaastik के द्वारा
May 13, 2012

पूनम जी, यदि सचमुच  ईश्वर है तो वह केवल  माँ है इसके अतिरिक्त और कुछ नहीं। माँ के प्रति आपकी श्रद्धा को नमन……

    मनु (tosi) के द्वारा
    May 18, 2012

    धन्यवाद दिनेश जी !

follyofawiseman के द्वारा
May 12, 2012

‘…… तो मैं अब किसी की मज़ाक भी उड़ता हूँ तो आपको लगता है मैं तारीफ कर रहा हूँ उसकी….वो बकवास लेख लिखा था उन्होने और आपने लिख दिया कि मैं उसकी तारीफ़ कर रहा हूँ, एक बार फिर से पढ़ लीजिएगा मैंने क्या लिखा था,,,,,,,और मैंने आपसे ऐसा क्या कह दिया कि आप मुझ पे तोहमत लगा रही है कि wiseman सब से खफा ही रहता है…..?

    मनु (tosi) के द्वारा
    May 18, 2012

    आप गुस्सा क्यूँ होते हैं wiseman जी !!कमेन्ट अच्छा लगा तो लिख दिया मुझे तो कहीं से भी व्यंग नहीं लगा … जिस तरह से आप टिप्पणी देते हैं संदीप जी यही लगता है आपने नेगेटिव नज़रिये से देखा इसे !!!

    follyofawiseman के द्वारा
    May 19, 2012

    ये भी तो हो सकता है कि जो मेरी टिप्पणी पढ़ते है वो नेगेटिव नज़रिया रखते हों….

MAHIMA SHREE के द्वारा
May 12, 2012

मैंने अपने साथी को इसी उम्मीद से निहारा मगर कुछ दुख अपनी पलकों में फिर बंद कर लिए मैंने अपने बच्चों को भी इसी हसरत से पुकारा पर उन्होने भी बयान अपने सवाल चंद कर दिये ॥ पर जिन अपनों से ही शिकायत हो उनसे कैसे कहें अपनी बात जो ‘सपने’ चुभते हो पलकों में उन्हे कैसे लगाएँ हाथ ॥ मैंने हर तरफ इस उम्मीद से देखा कहीं तो कोई मेरा होगा जिससे कह सकूँ मैं हर बात पोंछ मेरे आँसू जो रो लेगा मेरे साथ ॥ आदरणीया तोसी जी ये सच है माँ के सिवाए कोई नहीं समझ सकता .. क्योंकि वही है जो बिना सवाल किये आपके संतावना के लिए साथ कड़ी मिलती है .. पुरे धैर्य के साथ ……… बिना कोई तर्क के … सच तो यही है हम कुछ रच नहीं रहे यंहा बस अपनी माता के साथ अपने सम्बब्धो को साझा कर रहे है .. इस लिए मैं औपचारिकता नहीं करुँगी की … आपकी रचना अच्छी है …आदि आदि बस यही कहूँगी आपकी माता जी की याद में काश वो होती आपके साथ तो ये तन्हाई न होती अपनों के होते हुए भी रुसवाई न होती ना कोई तर्क होता ना लबो पे सवाल होता देख के तेरा उतरा चेहरा बस तेरे साथ होती और तेरा प्यार होता

    मनु (tosi) के द्वारा
    May 18, 2012

    महिमा जी नमस्कार !सही कहा आपने और कुछ पंक्तिया जोड़ कर मेरी रचना कि आपने शोभा बढ़ा दी …. धन्यवाद !!!

ANAND PRAVIN के द्वारा
May 11, 2012

पूनम जी, नमस्कार क्या खूब लिखा है आपने ……….बहुत दिनों बाद मंच पर आपकी रचना को देख अच्छा लगा निश्चय ही माँ के लिए आपकी संवेदना प्रभावी है जिसे आपने व्यक्त किया है………..बधाई आपको

    मनु (tosi) के द्वारा
    May 18, 2012

    आनंद जी सादर नमस्कार ! आप ही ने तो कहा था गेप दिया कीजिये :-) :-) ये तो मज़ाक था धन्यवाद कि आपको रचना अच्छी लगी !!!!

akraktale के द्वारा
May 11, 2012

पूनम जी सादर नमस्कार, बंद आँखों में तभी एक अपना दिखाई दिया मुझे मेरी माँ का सपना दिखाई दिया ॥ दौड़ कर जा पहुँची अपनी माँ के पास उसने एक मौन के साथ फेरा सिर पर हाथ ॥ अश्रु एक निकला मेरा जा गिरा माँ की गोद में बिना पुछे ही माँ को जैसे सब हो गया एहसास॥ सुन्दर भावाभिव्यक्ति. बधाई.

    मनु (tosi) के द्वारा
    May 18, 2012

    धन्यवाद आदरणीय अशोक जी ! नमस्कार !!!!!!!

May 10, 2012

माँ तो बस माँ होती है….!

    मनु (tosi) के द्वारा
    May 18, 2012

    हाँ अलीन जी माँ बस माँ होती है … आपके भाव के लिए आभारी हूँ

shashibhushan1959 के द्वारा
May 10, 2012

आदरणीय मनु जी, सादर ! “”अश्रु एक निकला मेरा जा गिरा माँ की गोद में बिना पुछे ही माँ को जैसे सब हो गया एहसास॥ अश्रु पोछे उसने मेरे मुझको गले लगाया धन्यवाद किया मैंने तभी प्रभु का जिसने माँ को बनाया ॥”" बहुत खूब ! सुन्दर भाव प्रस्तुति ! हार्दिक बधाई !

    मनु (tosi) के द्वारा
    May 18, 2012

    धन्यवाद शशि भूषण जी ! सादर !

Tamanna के द्वारा
May 10, 2012

बहुत अच्छा लेख… उम्मीद है आगे भी ऐसे ही विचार पढ़ने को मिलेंगे…

    मनु (tosi) के द्वारा
    May 18, 2012

    जी बिलकुल तमन्ना जी !! धन्यवाद आपका

चन्दन राय के द्वारा
May 10, 2012

मनु जी , इक इक शब्द आपकी माँ के प्रति अविरल प्रेम भाव को दर्शा रहा है , माँ ही इक ऐसा शब्द है जन्हा प्रयुक्त करो हर चीज महान हो जाती है , आपकी माता श्री के चरणों में मै अपने श्रद्धापुष्प अर्पित करता हूँ ,

    मनु (tosi) के द्वारा
    May 18, 2012

    धन्यवाद आदरणीय चन्दन जी !!

mparveen के द्वारा
May 10, 2012

पूनम जी नमस्कार, माँ आज भले ही हमारे संग नहीं है लेकिन जब जब हमें उनकी जरुरत हुयी है तब तब उन्होंने खवाबों में आकर संभाला है …. जब जब तुझे पुकारा , तुने दिया सहारा, तभी तो ओ माँ ! हमारा रिश्ता सबसे प्यारा !! पूनम जी जब भी याद आये बस आँखें बंद कर लेना और अपने दिल की बाते कह देना माँ तक पहुँच जाएँगी और फिर एक दिल को सुकून मिलेगा … दिल हल्का हो जायेगा … मैं तो यही करती हूँ .. धन्यवाद…

    मनु (tosi) के द्वारा
    May 18, 2012

    आदरणीय !परवीन जी मैं आपकी दिल से आभारी हूँ ! आपने मुझे मानसिक शांति प्रदान की !धन्यवाद आपका बहुत बहुत धन्यवाद !!!!

yogeshkumar के द्वारा
May 10, 2012

माँ को लेकर प्यारी प्यारी और ढेर सारी बातें तो बहुत होती हैं..मगर इस भारत में माँ की हालत ख़राब क्यों हैं??? समझ नहीं पता हूँ….

    मनु (tosi) के द्वारा
    May 18, 2012

    आदरणीय योगेश कुमार जी !आपसे सहमत हूँ मैं । पर मैंने अपनी माँ कि मरते दम तक सेवा कि इसका आत्म संतोष है मुझे ।पर मैं अपने आस-पास जब भी नज़र दौड़ाती हूँ तो वाकई दुख होता है ।

sonam के द्वारा
May 10, 2012

हेल्लो पूनम दी क्या कहूँ कुछ समझ नहीं आ रहा ! जब मैं अपनी मम्मी से दूर होकर तड़प जाती हूँ तो समझ सकती हूँ कि आप पर क्या बीत रही होगी ! लेकिन दुखी मत होइए , माँ हो न हो वो तो दिल में रहती है न , सांसो में बसती है ! आप उन्हें याद करके रोयेंगी तो उन्हें भी तो दुःख होगा ! Sooooooooooooooo be happy………….n keep smiling.

    मनु (tosi) के द्वारा
    May 18, 2012

    धन्यवाद सोनम गुड़िया !मैं समझती हूँ ,पर ……….

follyofawiseman के द्वारा
May 9, 2012

 वो सायादार शजर जो मुझसे दूर, बहुत दूर है, मगर उसकी लतीफ़ छांव सजल, नर्म चाँदनी की तरह मिरे वजूद, मिरे शख़्सियत पे छाई है वो माँ की बांहों की मानिन्द मेहरबाँ शाखे जो हर आज़ब मे मुझको समेट लेती है…………!

    मनु (tosi) के द्वारा
    May 18, 2012

    वाह !वाह ! क्या खूब ! wiseman जी

Mohd Haneef "Ankur" के द्वारा
May 9, 2012

मनु जी- माँ के प्रति आपकी श्रद्धा को सलाम करता हूँ……….बहुत ही मार्मिक रचना के लिए बधाई स्वीकार करे. मेरे ब्लॉग पर भी आपका स्वागत है.

    मनु (tosi) के द्वारा
    May 18, 2012

    धन्यवाद अंकुर जी !जी बिलकुल आऊँगी

Abhinav Srivastava के द्वारा
May 9, 2012

दिल को छूने और निशब्द कर देने वाली पंक्तियाँ…

    मनु (tosi) के द्वारा
    May 18, 2012

    धन्यवाद अनुभव जी ! कि आपको रचना पसंद आई आभारी हूँ कि आप मेरी वाल पर आए !

Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
May 9, 2012

अश्रु एक निकला मेरा जा गिरा माँ की गोद में बिना पूछे ही माँ को जैसे सब हो गया एहसास !! मनु जी, इन पंक्तियों के माध्यम से सुन्दर अभिव्यक्ति दी है आप ने !बधाई !!

    मनु (tosi) के द्वारा
    May 18, 2012

    आदरणीय आचार्य विजय गुंजन जी , सादर नमस्कार ! धन्यवाद करती हूँ आपका ।कि आपको ये रचना पसंद आई

मनु (tosi) के द्वारा
May 19, 2012

यहाँ भी महोदय हमारी ही गलती और वो क्या जो आप लोगो को डराते हैं कभी जान से मारने कि धमकी देते हैं … अरे ये तो सोचिए महाशय !हमारी जगह कोई और होता तो उसका तो डर के मारे राम – नाम सत हो गया होता तो , ये तो हम हैं कि बच गए … follyofawisemanजी


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