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उनका दर्द भी हम जैसा है

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mamamamama

उनका दर्द भी हम जैसा है

मेरी सखी  वृक्षवंशी रातरानी के पास जब मैं आज बैठी तो मुझे अपनी रुड़की तक की यात्रा याद आ गई इस यात्रा में जो बाईपास दिखे तो अकस्मात मेरी नज़र उन कटे हुये पेड़ों पर पड़ गयी जिनके बस अब केवल  अवशेष शेष थे … एक टीस सी मन मे उठी ।और मन दुखी हो गया । वहाँ से लौटते ही अपनी सखी के पास आ बैठी । पर मन बेचैन था ,यूं लगा मेरी सखी कह रही हो तुम्हारा  दुख मैं बिना कहे ही समझती हूँ… पर अपने भाव लोगो तक तुम्हें कहकर या लिखकर पहुचाने होंगे इसलिए मैं अपने आपको रोक न पाई … और अपना दुख आप लोगो से साझा करने चली आई ‘। बात शुरू करती हूँ यहाँ से ;-

वृक्ष हमारी धरती की अमूल्य धरोहर है । जिनके बिना जीवन संभव नहीं ,जो प्राकृतिक रूप से हमारे जीवन को संपूर्णता प्रदान करते हैं । बचपन में जब हमसे स्कूल मे वृक्षों पर निबंध लिखने को कहा जाता तो 8-10 लाइनों मे वृक्षों की मनुष्य जीवन में उपयोगिता समझाई जाती। उदाहरण के लिए :-
1-वृक्ष हमे छाया देते हैं ।
2-पेड़ हमे खनिज  पदार्थ देते हैं ।
3-पेड़ों से हमें औक्सीजन मिलती है ,शुद्ध हवा मिलती है ।
4-पेड़ों से हमे दवाइयाँ भी मिलती हैं ।
5-घर के खिड़की –दरवाज़े तथा फर्नीचर आदि के लिए पेड़ों से हमे लकड़ी मिलती है ।
6-पेड़ों से हमे खाने के लिए फल व अनाज उपलब्ध होता है ।
7-पेड़ों से हमे ईंधन के लिए लकड़ियाँ प्राप्त होती हैं ।
8-पेड़ों की पत्तियों से खाद मिलती है ।
9-वृक्षों से हमें जानवरों के लिए चारा प्राप्त होता है ।
10-पेड़ों से हमें इत्र परफीउम इत्यादि मिलती है । इत्यादि इत्यादि
जबकि इनकी महत्ता हमारे जीवन मे कहीं अधिक है । हर तरह से मनुष्य जीवन पेड़ों (वृक्षों ) पर आश्रित है । खाने से लेकर पहनने तक ,नहाने से लेकर सोने तक हर जगह पर  पेड़ों से बनी कोई न कोई चीज हमारे जीवन में सहयोगी है । जहाँ नदी किनारे पेड़ लगाकर मिट्टी के कटान व पानी के अनुचित बहाव को रोका जाता है वहीं बड़े-बड़े बाँध बनाने मे भी पेड़ों से ली लकड़ियाँ ,तख़ते इत्यादि उपयोग मे लाये जाते हैं ।
आप सब जानते हैं कितना ही लिखूँ ,पेड़ों की कितनी ही उपयोगिता गिनाती जाऊँ । पेड़ों की महता किसी भी बिन्दु पर जाकर खतम नहीं होगी ,अर्थात इसका क्षेत्र बहुत विशाल है ।
ये तो हुई पेड़ों की उपयोगिता जो हर मनुष्य व हर जीव के लिए महत्वपूर्ण है ।
इसके अलावा एक और बात भी आप सब जानते होंगे । कि पेड़ रात को सोते हैं और दिन में जागते हैं और साँस भी लेते हैं …हमारे भारतीय वैज्ञानिक श्री जगदीश चन्द्र बसु इस बात को काफी पहले साबित कर चुके थे। पर वर्तमान में हुये कई और शोधों से यह साबित हुआ है कि पेड़ दुख,दर्द ,हँसी ,क्रोध ,घृणा सब महसूस करते हैं । वहीं यह भी साबित हुआ है कि यदि किसी क़त्ल कि जगह पर पेड़-पौधे गमले में या ज़मीन पर लगे हो तो वो अच्छे गवाह भी साबित होते हैं ।यानि पेड़ –पौधे गवाही भी देते हैं । बात यहीं पर खत्म नहीं होती कहते हैं कि अगर कोई किसान अपने खेतों पर सुबह –शाम जाकर अपनी फसल को प्यार से निहारे व खेतों मे अंदर जाकर उनपर प्यार से हाथ फेरे तो ओर  खेतो की फसल की  तुलना में उस खेत की फसल ज़्यादा स्वस्थ होती है ,व अच्छी पैदावार देती है ।
इससे यह पता चलता है कि पेड़-पौधे जहाँ मनुष्य जीवन मे अपना महत्वपूर्ण योगदान प्रदान करते हैं वहीं ये मनुष्य की तरह ही हर चीज महसूस करते हैं ।
आप सोचते होंगे कि मैं कहना क्या चाहती हूँ या पेड़ों की उपयोगिता गिना रही हूँ । नहीं ये तो बस एक भूमिका थी अपनी बात कहने के लिए “मैं हर उस इंसान तक अपनी बात पहुंचाना चाहती हूँ जो अपने थोड़े से फ़ायदे के लिए पेड़ों को एक निर्जीव चीज समझ काट फेंकता है, मैं उससे ये अनुरोध करूंगी कि उस पेड़ का दर्द भी वो महसूस करे । एक वृक्ष जिस पर उसने कुल्हाड़ी चलाई है एक जीते –जागते मानव से कम नहीं । हाँ बस वह चिल्ला=चिल्ला कर अपना दर्द हर इंसान को नहीं बता सकता। उसके दर्द को हमे खुद समझना होगा ॥

जाने कितने बने बाई पास
और कितने पेड़ मारे गए
जाने कितने हो गए उदास
कहीं पर केवल उनके
शरीर के अवशेष
कहीं पर नई-नई लाश
जाने कितने बने बाई पास
सिसक-सिसक कर
मुझसे कुछ कहना
चाह रहे थे ……
पर मेरी आँख के आँसू
शायद
उन्हे नज़र आ रहे थे ,
इसलिए वो शान्त हो
स्वयं दर्द सा पी गए
उनके दर्द पीने के कारण
ही तो
आज तक हम जी गए
उनके इस त्याग को
काश हम समझ पाते
उन्हे मारने से पहले
उनके बीज
कहीं ओर रोपे जाते
रोपे जाते ….. पूनम ‘मनु’

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33 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
May 15, 2012

आपकी पीड़ा में मैं भी शामिल हूँ. बधाई.

    मनु (tosi) के द्वारा
    May 18, 2012

    वेलकम सर जी !

follyofawiseman के द्वारा
May 8, 2012

” बचपन में जब हमसे स्कूल मे वृक्षों पर निबंध……..” आज भी आपने निबंध ही लिखा है…….वही बचपन वाला………. लेख बैज्ञानिक तो है लेकिन मनोवैज्ञानिक नहीं है…..इसीलिए लोग पढ़ कर तारीफ तो कर देंगे लेकिन को खास असर नहीं होगा उन पर …आपने ने लिखने के लिए लिख दिया लोग पढ़ने के लिए पढ़ लेंगे……और शिष्टाचार या लोभ वश कमेंट भी कर देंगे………..लोगों को अच्छी-अच्छी बातें कह कर सुलाने की नहीं हिलाने की जरूरत है……”सुना नहीं आपने ‘दिल पे लगेगी तब ही बात बनेगी……”……इसीलिए बचपना छोड़िए…और चोट कीजिए………

    मनु (tosi) के द्वारा
    May 9, 2012

    wise man ji wakai aapki baat sochne wali hai koshish karungi aise lekh likhun jo sabko pasand aayein aur hilayein dhanywad

rekhafbd के द्वारा
May 7, 2012

तोशी जी ,पर्यावरण पर ज्ञानवर्धक लेख ,बधाई

    मनु (tosi) के द्वारा
    May 7, 2012

    धन्यवाद रेखा जी !

    मनु (tosi) के द्वारा
    May 18, 2012

    धन्यवाद रेखा जी आपको अपने ब्लॉग पर देखकर बहुत अच्छा लगा !सादर !!!

ajay kumar pandey के द्वारा
May 6, 2012

तोशी जी नमस्कार आपने सही कहा की जागरण मंच पर पक्षपात होता है मैंने इसी पर एक कविता लिखी है लेखन वह चिंतन की व्यथा गाथा कृपया मेरे इस लिंक पर जायें http..//ajaykumarji.jagranjunction.com dhanyawaad

    मनु (tosi) के द्वारा
    May 7, 2012

    namaskar! अजय जी बिलकुल आपके लिंक पर जाऊँगी !जहाँ तक पक्षपात की बात है उसका मैं समर्थन नहीं करती , हाँ माँ बाप ,भाई -बहन ,दोस्त समझकर मैं जेजे से लड़ती जरूर रहूँगी ,, और अपना हक़ लेकर रहूँगी आप भी लड़िए सच !!!पर मर्यादा मे रहकर जब हम मर्यादा मे रहकर अपनी बात किसी के सामने रखते हैं तो उसके सुलझने की संभावना ज़्यादा रहती है ,वरना बिना बात बात उलझती जाती है … धन्यवाद

May 6, 2012

मनु जी सादर ! वृक्षों की महत्ता को दर्शाता लेख…बधाई.

    मनु (tosi) के द्वारा
    May 7, 2012

    धन्यवाद गौरव जी !सादर अभिवादन

shashibhushan1959 के द्वारा
May 4, 2012

आदरणीय मनु जी, सादर ! आपने बहुत विचारणीय प्रश्न उठाया है ! वृक्ष तो हमारे लिए उतने ही आवश्यक हैं जितने हवा और पानी ! समय रहते कदम नहीं उठाने पर काफी नुक्सान हो सकता है ! सार्थक रचना !

    मनु (tosi) के द्वारा
    May 7, 2012

    मेरा लिखा सार्थक रहा जब आप सबका समर्थन मिला धन्यवाद शशि भूषण जी ! सादर अभिवादन !!

Mohd Haneef "Ankur" के द्वारा
May 4, 2012

मनु जी, सादर- मनु जी आपने बहुत ही सार्थक लेख व कविता प्रस्तुत की. पर्यावरण संरक्षण आज नितांत आवश्यक हो गया है. अगर इस दिशा में सरकार और हम नहीं चेते तो हम स्वंय आपने हाथ से अपनी कब्र खोद लेंगे. मैं चाहता हूँ कि किसी दिन आप मेरे ब्लॉग पर भी आँए और मेरी इस्लाह करे. http://www.hnif.jagranjunctio.com

    मनु (tosi) के द्वारा
    May 7, 2012

    जी बिलकुल आऊँगी थोड़ा सा मैं व्यस्त थी इसी कारण मैं ज्यादा समय इस ब्लॉग पर नहीं लगा पाई ।प्रतिक्रिया हेतु आपका धन्यवाद ! अंकुर जी !

yogi sarswat के द्वारा
May 4, 2012

आदरणीय तोशी जी ,नमस्कार ! कभी किसी भी ऐसे स्थान से निकलते देख कर बहुत दुःख होता है जिस डाल पर बैठे हैं उसी को काटने का कार्य ,यदि आवश्यक हो भी तो उसका विकल्प मात्र दिखावे का नहीं यथार्थ में वृक्षारोपण होना चाहिए और उन पेड़ों की विशेष देखभाल भी हो. पर्यावरण के साथ खिलवाड़ है ये जो स्वयं हमारे लियेही गड्ढा तैयार हो रहा है.बहुत खूब !

    मनु (tosi) के द्वारा
    May 7, 2012

    हाँ योगी जी ! अब हम सबको मिलकर कदम उठाना ही होगा , आप जैसे बुद्धिजीवी लोगो के सामने जब भी मैंने कोई समस्या रखी आप सबने मेरा साथ दिया । और हौसला भी … मैं आपकी आभारी हूँ सादर अभिवादन धन्यवाद के साथ !

sonam के द्वारा
May 4, 2012

नमस्कार पूनम दी कहा थी इतने दिनों से ……….! न कोई खबर …………….!

    मनु (tosi) के द्वारा
    May 7, 2012

    हाँ !हाँ ! मेरी छोटी बहन जैसी गुड़िया तुमने मुझे याद किया सचमुच बहुत अच्छा लगा ! मैं पारिवारिक कारणो से थोड़ा ब्लॉग से दूर थी पर अब मिलती रहूँगी ॥ धन्यवाद सोनम !

akraktale के द्वारा
May 4, 2012

पूनम जी सादर नमस्कार, बिलकुल सही कहा आपने वृक्ष हमारे जीवन के वो साथी हैं जो हमें प्राण वायु दे रहे हैं यदि इनका अस्तित्व मिटा तो फिर हमारा अस्तित्व असंभव है. और फिर ये हमारी भावनाओं से भी जुड़े होते हैं. इस पर आदरणीय श्री कृष्णा श्री जी द्वारा “ठूंठ” एक रचना प्रस्तुत की गयी थी. आज उन्नत मशीनी युग में इन पेड़ों को स्थानांतरित भी किया जा सकता है यदि इसका उपयोग किया जाए तो कई पेड़ बचाए जा सकते हैं.हमारे शहर में सड़कों के चौडीकरण में कई बार यह प्रयोग किया गया किन्तु दुःख की सिर्फ यह किसी व्यक्ति या संस्था द्वारा धन खर्च करके ही किया गया. आपको सकारात्मक सोच को पूर्ण समर्थन है.

    मनु (tosi) के द्वारा
    May 7, 2012

    आदरणीय अशोक जी , सादर नमस्कार ! जी वृक्षो की दुर्दशा के लिए कोई भी जिम्मेदार हो पर अब जनमानस को ही मिलकर कदम उठाना होगा … कुछ आप चलें कुछ हम एक नई पहल शुरू करें …धन्यवाद

dineshaastik के द्वारा
May 4, 2012

पूनम जी पर्यावरण  के प्रति जागरूप करता हुआ   सुन्दर आलेख   की प्रस्तुति के लिये बधाई। क्षमा करना एक  बात  समझ  में नहीं आई, यदि तार्किक  ढ़ंग  से समझायेंगी की निश्चित  ज्ञान वर्धक  होगा- यदि किसी क़त्ल कि जगह पर पेड़-पौधे गमले में या ज़मीन पर लगे हो तो वो अच्छे गवाह भी साबित होते हैं ।यानि पेड़ –पौधे गवाही भी देते हैं ।

    मनु (tosi) के द्वारा
    May 7, 2012

    आदरणीय दिनेश जी , सादर नमस्कार ! दिनेश जी पहले तो आपकी प्रतिक्रिया हेतु दिल से आभारी हूँ ॥ दूसरी आपने पूछा कैसे? तो दिनेश जी रेसर्च से यह साबित हो गया है की जब भी पेड़ -पौधों के आस-पास कोई जघन्य अपराध यानि कत्ल जैसी वारदात होती है तो उनका उसी पल बढ्ना रुक जाता है ,जिससे उस मिस्ट्री को सुलझाने में सफलता मिलती है । कई केस इसी प्रकार सोलव किए गए हैं ….. उम्मीद है है आपकी जिज्ञासा का समाधान हो गया होगा ॥ धन्यवाद

चन्दन राय के द्वारा
May 3, 2012

मनु जी , आपके पर्यावरण प्रेम का पता आपके आलेख और मनोभाव से लग रहा है , निश्चित ही आपका प्रयास रंग लायेगा ,

    मनु (tosi) के द्वारा
    May 7, 2012

    धन्यवाद चन्दन जी !

vikramjitsingh के द्वारा
May 3, 2012

मनु जी…..नमस्कार… पर्यावरण के प्रति जागरूकता लाने का एक सराहनीय प्रयास…… अच्छी कोशिश……

    मनु (tosi) के द्वारा
    May 7, 2012

    विक्रम जीत जी नमस्कार ! और आपकी प्रतिक्रिया हेतु धन्यवाद !!!

nishamittal के द्वारा
May 3, 2012

मनु जी ,कभी किसी भी ऐसे स्थान से निकलते देख कर बहुत दुःख होता है जिस डाल पर बैठे हैं उसी को काटने का कार्य ,यदि आवश्यक हो भी तो उसका विकल्प मात्र दिखावे का नहीं यथार्थ में वृक्षारोपण होना चाहिए और उन पेड़ों की विशेष देखभाल भी हो. पर्यावरण के साथ खिलवाड़ है ये जो स्वयं हमारे लियेही गड्ढा तैयार हो रहा है.

    मनु (tosi) के द्वारा
    May 7, 2012

    जी हाँ निशा जी ! आपकी प्रतिक्रिया के लिए आभारी हूँ । आपको लेख अच्छा लगा तहे दिल से शुक्रिया !

rekhafbd के द्वारा
May 2, 2012

मनु जी ,बहुत ही बढ़िया रचना और उसकी प्रस्तुति ,लिखते रहिये बधाई

    मनु (tosi) के द्वारा
    May 7, 2012

    धन्यवाद रेखा जी !!! आभारी हूँ !

satyavrat shukla के द्वारा
May 2, 2012

मनु जी नमस्कार ,बहुत ही अच्छा आलेख है और जिस बात की तरफ निर्देशित किया है वो बहुत ही आवश्यक है विकास की इस यात्रा में हम वातावरण के साथ साथ अपनी आवश्यकता के साथ भी खिलवाड़ कर रहे हैं |इस विषय में बहुत जी जादा ध्यान देने की आवश्यकता है |आपका प्रयास सराहनीय है |

    मनु (tosi) के द्वारा
    May 7, 2012

    धन्यवाद सत्यव्रत जी !!! सादर


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