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जागरण जंक्शन पर मेरा सफर कुछ खट्टे -मीठे पल “Feedback”

Posted On: 10 Apr, 2012 Others में

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जागरण जंक्शन के मंच पर मेरा सफ़र feedback


आदरणीय मेरे मित्र गण ,बंधुगण ,बहनें  और जागरण जंक्शन की टीम !
सादर नमस्कार !
यूं तो दैनिक  जागरण से मेरा नाता पुराना है।कभी जब मैं  छोटी थी ,रही होंगी 8-9 साल की तब मेरे पिताजी के सीधे हाथ की हड्डी एक दुर्घटना वश टूट गई ,वो एक वकील थे । उन दिनो जब भी कोई एप्लीकशन या  मुकदमे की फाइलों में जो कुछ भी लिखना होता ,वो बोलते जाते मैं लिखती जाती थी । इसी मे से एक काम होता था दैनिक जागरण में मुख्य रूप से लिखी कोई घटना (कानूनी धारा जैसी  )या रिपोर्ट को काट कर संबन्धित विभाग मे कुछ कागजात के साथ नत्थी कर भेजना । भेज तो पिताजी देते थे ।पर मेरा दैनिक-जागरण से लगाव उसी समय शुरू हो गया था ।एक-एक खबर ध्यान से पढ्ना और पिताजी से विचार-विमर्श करना ,उसकी कटिंग को संभाल कर रखना तथा जहां पर जरूरत हो वहाँ पर नत्थी करना मेरा दैनिक कार्य होता था
मेरे कई अखबारों में आर्टिकल तथा कवितायेँ छपती रहती हैं ।पर घर मे आज भी दैनिक जागरण ही आता है । दैनिक जागरण में भी मेरे यदा-कदा मेरे छोटे-मोटे आर्टिकल आते रहते हैं ।
इससे मेरा लगाव जाने क्यूँ है मैं नहीं जानती । जोश का  तो मेरे पास आपको पहला संस्कारण  भी मिल जाएंगा ॥
जागरण जंक्शन से मेरी पहली मुलाकात
जागरण जंक्शन से जुड़ना सयोंग से हुआ मैं अपने गुरु जी श्री निर्मल गुप्त जी की फेस बुक वाल पर कुछ देख रही थी वही पर श्री सूर्यकांत द्रीवेदी जी के ब्लॉग का लिंक दिखाई दिया ।आर्टिकल अच्छा था उसपर कमेन्ट देने का मन हुआ तो क्लिक करते ही जागरण जंक्शन का ब्लॉग खुल गया धीरे-धीरे देखा तो मैं हर्षित हो उठी ,जो मैंने सपने में भी नहीं सोचा था वो मेरे सामने था ,‘अपने सपने व अपने भावों को व्यक्त करने की स्वतन्त्रता प्रदान करने वाला मंच ” देखकर मन झूम उठा । झट-पट अपना खाता खोला और ब्लॉग के मंच से जुड़ गई ,जिसे भी पढ़ूँ वही मुझसे बेहतर … मज़ा आ गया ,मैं पढ़ती तो रही पर कमेन्ट न कर पाई ।कारण तकनीक कुछ समझ न आ रही थी । मुझे वैसे भी नेट कम चलाना आता है । फिर मै कोशिश करती रही और मंच तक पहुच ही गई, सब एक से एक बेहतर लिखने वाले -पढ़ने वाले । मंच बहुत अच्छा लगा और मैंने भी अपनी रचना पोस्ट कर दी । सब लोगों ने उत्साह बढ़ाया मेरा स्वागत किया ,बहुत अच्छा लगा । मन में थोड़ा सा डर था कि पता नहीं जमे-जमाये लोग मुझे कैसे टिकने देंगे !पर सब मेरा भ्रम साबित हुआ ।
हर व्यक्ति मंच का हीरे जैसा है । सब लोग बुद्धिजीवी हैं ,न द्वेष न ईर्ष्या । मंच  मुझे  मेरे परिवार सा लगा फिर तो मैंने एक के बाद एक कई रचनाएँ पोस्ट की । मेरी रचनाएँ जहाँ बेस्ट ब्लॉग में शामिल हुयी वहीं मुझे बेस्ट ब्लॉगर ऑफ द वीक का ताज भी मिला । मन मयूर सा झूम उठा ।बेस्ट ब्लॉगर चुने जाने के बाद तो यूं लगा जैसे जेजे ने मेरे पंखों को उड़ान दे दी और मेरे भावों में इंद्र्धनुषी रंग भर दिये … सचमुच धन्यवाद जागरण जंक्शन !!!

मुझे आपसे कई बार शिकायत हुई ,हर बार शिकायत अपने आप गलत सी लगी क्यूंकी मेरे ज्यादा नेट न जानने के कारण जो भी परेशानी होती थी मुझे उसका कारण मैं आपको समझती थी पर अब सब ठीक है
जागरण जंक्शन की  टीम अपने आप में इतनी दक्ष है कि इसमें कोई संदेह नहीं कि वह इस मंच को  और भी बेहतर बनाने के लिए प्रयासरत  होगी।बस थोड़ी सी यही समस्या है कि कमेन्ट देने में समय लगता है जिस कारण चाहते हुये भी अपने साथी रचनाकारों कि रचनाओं पर टिपन्नी जल्दी-जल्दी नहीं दे पाती हूँ ।
इसे बेहतर बनाने के लिए बस इतना और कीजिये ,दिन रखिए

जैसे – पहला सप्ताह कविताओं का
दूसरा सप्ताह लेख का
तीसरा सप्ताह -आपका दिया हुआ टोपिक
चौथा सप्ताह गज़ल इत्यादि के लिए हो ।

इससे हर व्यक्ति को अपनी प्रतिभा दिखने का मौका मिलेगा ,और हर रचना के बीच में कम-स- कम 7 दिन का अंतर रखिए ।

उम्दा तकनीक और उम्दा रचनाकर -ऐसा मंच मिला  मुझे  ,मैं यही तो चाहती थी । बहुत  दिनो से तलाश थी आखिर कार मैंने तुम्हें पा ही  लिया ।ज्यादा लंबा सफर अभी तक मैंने जेजे के साथ तय नहीं किया है ,पर इरादा काफी लंबा जाने का है , एक बचपन कि सखी  जैसा है जागरण जंक्शन । जिससे या जिस पर मैं अपने मन की  हर भावना शेयर कार सकती हूँ
बस इतना ही कहूँगी इस मंच के साथ मेरा हर पल यादगार है ।
एक  कविता आपके लिए …जेजे

_________________________
तुम निर्झर झरने से
बहते हो
चुप !कोई शोर नहीं
बस एक टिप-टिप
श्याम वर्ण पर
ओजस्वी
धरती की प्यास बुझाते
पर कोई कर नहीं ॥
मन के मयूर के पंख
लाल, नीले, पीले
भिज्ञ-अनभिज्ञ
पर एक इन्द्र-धनुष
दिखाते -रिझाते
पर एक मन,है
कहीं जो  तर नहीं  ॥
सब तृप्त -अतृप्त से निहारते
कुछ है जो छूट जाता उनका,
पर तुम चुप
अपना प्रेम सभी पर बरसाते॥
और मन ही मन
हृदय में पाले एक आस
मैं भी
हर बरस तुम्ही को
मिलने चली आती ….
कि
कभी तो कहीं से दिख जाऊँगी
मैं भी तुम्हें
तब तब…
मेरे रंग के ये लाल डोरे,
लिपट जाएंगे तुमसे
तब शायद कह दो तुम मुझसे
मैं तुमसे ही मिलने आता हूँ
हाँ तुमसे ही मिलने आता हु
….. मेरी लाल बहूटी ……….पूनम’मनु’

लाल बहूटी ____________एक बहुत ही सुंदर लाल रंग की  घास, जो सावन के महीने मे कहीं-कहीं बहुत कमी के साथ दिखती है ॥
धन्यवाद  ……………….

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26 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

sinsera के द्वारा
April 13, 2012

पूनम जी नमस्कार, जागरण का साथ तो लगभग सभी का एक जैसा ही रहा लेकिन आप ने बहुत ही सुन्दर कविता लिख डाली….ठन्डे ठन्डे सॉफ्ट भावों के साथ…..बधाई….

    मनु (tosi) के द्वारा
    April 14, 2012

    धन्यवाद सिनसेरा जी ….

akraktale के द्वारा
April 12, 2012

पूनम जी सादर नमस्कार, मंच से ना सही जागरण से आपका पुराना नाता है जानकार प्रसन्नता हुई. आपका लेखन भी बहुत अच्छा है और आपको लिखने का शौक भी है इसीलिए आपको कभी मंच से शिकायत भी नहीं रही. आगे भी आप अपने लेखन कौशल से मंचवासियों को प्रभावित करती रहें. शुभकामनाएं.

    मनु (tosi) के द्वारा
    April 14, 2012

    धन्यवाद अशोक जी !

चन्दन राय के द्वारा
April 12, 2012

मनु जी, नमस्कार आपके सुझावों को मेरा पूर्णत समर्थन , और जागरण JUNCTION को बहुत ही सुंदर कविता से आभार प्रकट किया , आप जैसे गुनी लेखको ने मंच की सुन्दरता बधाई है

    मनु (tosi) के द्वारा
    April 14, 2012

    धन्यवाद चन्दन जी !

yogi sarswat के द्वारा
April 12, 2012

तोशी जी नमस्कार ! सटीक और स्वस्थ लेखन ! बहुत बहुत शुभ्काम्नायेरिन !

    मनु (tosi) के द्वारा
    April 14, 2012

    धन्यवाद योगी जी !

prateekraj के द्वारा
April 11, 2012

मनु जी, बड़ी सुन्दरता के साथ आपने जागरण के साथ अपने काफी लम्बे अनुभवों को व्यक्त किया है. काबिल-इ-तारीफ

    मनु (tosi) के द्वारा
    April 14, 2012

    धन्यवाद प्रतीक जी !

ANAND PRAVIN के द्वारा
April 11, 2012

पूनम जी, नमस्कार आपके जे जे से लगाओ को पढ़ अच्छा लगा………….आपको आगे के लिए भी शुभकामनाएं

    मनु (tosi) के द्वारा
    April 11, 2012

    नमस्कार आनंद जी ! संतुलित प्रतिक्रिया हेतु धन्यवाद

sonam के द्वारा
April 11, 2012

नमस्कार पूनम जी आपने जे जे के प्रति अपनी भावनाओ को हमारे साथ शेयर किया उसके लिए शुक्रिया !

    मनु (tosi) के द्वारा
    April 11, 2012

    वेलकम सोनम जी

dineshaastik के द्वारा
April 11, 2012

 सुनहरी यादों का खजाना, मंच  पर शेयर करने के लिये आभार… आपके सुझावों का समर्थन करता हूँ।

    मनु (tosi) के द्वारा
    April 11, 2012

    नमस्कार दिनेश जी !आपके प्रोत्साहन के लिए आपकी तहे दिल से आभारी हूँ

RAJEEV KUMAR JHA के द्वारा
April 10, 2012

सुन्दर यादों का सफ़र .

    मनु (tosi) के द्वारा
    April 11, 2012

    धन्यवाद राजीव जी !

Rajkamal Sharma के द्वारा
April 10, 2012

आपने मेरी “प्यारी” जागरण कि तारीफ कि मन प्रसन्न हुआ धन्यवाद :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :|

    मनु (tosi) के द्वारा
    April 11, 2012

    जी! मैंने आपकी प्यारी जागरण की तारीफ की उसके लिए आपको धन्यवाद कहने की आवश्यकता नहीं मान्यवर वो मेरी भी है। हा हा हा (नाराज़ न होना )

vikramjitsingh के द्वारा
April 10, 2012

पूनम जी सादर, बहुत यादगार सफ़र है आपका, और उससे भी बढ़िया है आपका लेखन…….सलीके से लिखा हुआ….

    मनु (tosi) के द्वारा
    April 11, 2012

    नमस्कार विक्रम जीत जी ! आपकी प्रतिक्रिया हेतु धन्यवाद

nishamittal के द्वारा
April 10, 2012

आपकी भावपूर्ण रचना और सुनहरी यादें अच्छी लगी.

    मनु (tosi) के द्वारा
    April 11, 2012

    धन्यवाद मेम (निशा जी)

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
April 10, 2012

स्नेही मनु जी, सादर आप तो लेखिका है ही पर अछि लेखिका हैं, भाव पूर्ण रचना, पूरी की पूरी. बधाई.

    मनु (tosi) के द्वारा
    April 11, 2012

    धन्यवाद कुशवाहा सर !आपका दिल से आभार व्यक्त करती हूँ


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