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नन्ही कली

Posted On: 8 Apr, 2012 में

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DOLLLLLLL

एक नन्ही फूल की कली या मासूम बालिका में क्या अंतर है कोई बता सकता है ???

एक नन्ही कली का दर्द

___________________

न जाने किस दुष्ट की छाया

आज उस कुसुम पर पड़ी

और मर्दन कर

क्षत-विक्षत कर दिया

उसका जीवन॥

बड़े संघर्ष के बाद तो

मिला था उसे

यह जीवन

कई बार तो  साँस डलने से

पहले ही घोंटना चाहा उसका गला

साँस पड़ी तो टहनी से अलग

करना चाहा नन्ही कली को

बहुत प्रार्थना और विनती के बाद

ले पाई वह जन्म

पर यह क्या ??

यहाँ तो और भी कई शैतान -

हैवान बैठे थे

जिन्होने आज उस नन्ही मासूम को

कर दिया समाप्त

पंखुरी-पंखुरी

अलग कर उसकी

नोच -नोच खा गए ॥

अथाह दुख के सागर में डूबी

एक अन्तिम श्वास

और एक विचार उसकी आँखों

में साफ दिखा

“इससे तो अच्छा होता कि

मुझे गर्भ में ही मार दिया होता ”

विछोह के दंश का अनुमान

होते ही सहचरी पत्तियाँ

सिसक -सिसक रो दी ………पूनम ‘मनु’


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47 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Sumit के द्वारा
April 15, 2012

दिल को छूती रचना ,,,,,,,सुंदर रचना ,,,,,,, http://sumitnaithani23.jagranjunction.com/2012/04/12/नर-और-नारायण/

    मनु (tosi) के द्वारा
    May 7, 2012

    धन्यवाद सुमित जी !!!

Kumar Gaurav के द्वारा
April 12, 2012

मनु जी सादर प्रणाम बड़ी गहराई से लिखी गई रचना. बेहद सुन्दर भाव.

    मनु (tosi) के द्वारा
    April 14, 2012

    धन्यवाद गौरव जी !

April 9, 2012

आपकी इस कृति के लिए…..सलाम करना चाहूँगा आपको. एक बार फिर उपयुक्त विषय उठाने के लिए हार्दिक आभार.

    ANAND PRAVIN के द्वारा
    April 9, 2012

    पूनम जी, नमस्कार आपकी कविता पढ़ kar mere bhi कुछ यही बोल है आपके लिए………………..

    मनु (tosi) के द्वारा
    April 10, 2012

    धन्यवाद अनिल जी !

yamunapathak के द्वारा
April 9, 2012

soooooooooooo pathetic!!!!!!!!!!

    मनु (tosi) के द्वारा
    April 10, 2012

    आभारी हूँ आपकी यमुना जी !

Ankur के द्वारा
April 9, 2012

मनु जी, नमस्कार, बहुत ही दर्द विदारक रचना को जन्म दिया है आपने. पड़ कर मेरे तो रोंगटे खड़े हो गए. कन्या भुरण हत्या और फिर समाज में मौजूद बह्शियों द्वारा नन्ही कलि की अस्मत को तार-तार कर देना. बाकई में दरिंदों की करतूत को उजागर किया है आपने. मेरी भी दो पंक्तियाँ देखिये- करुना का स्वर एक कानों में सुनाई दिया, मम्मी- मम्मी मैं भी घर आना तेरे चाहती हूँ / आप मेरे ब्लॉग पर भी आइयेगा. शायद आपकी और मेरी लेखन शैली सामान है. http://www.hnif.jagranjunciton.com

    मनु (tosi) के द्वारा
    April 10, 2012

    जी बिलकुल !धन्यवाद अंकुर जी

sanjay dixit के द्वारा
April 9, 2012

ह्रदयस्पर्शी कविता,मर्म को छूती हुई,बधाइ पूनम जी

    मनु (tosi) के द्वारा
    April 10, 2012

    धन्यवाद संजय जी !

RAJEEV KUMAR JHA के द्वारा
April 9, 2012

बहुत सुन्दर कविता,मनु जी. इससे तो अच्छा होता कि मुझे गर्भ में ही मार दिया होता विछोह के दंश का अनुमान होते ही सहचरी पत्तियाँ सिसक -सिसक रो दी बहुत ही भावपूर्ण अभिव्यक्ति है.

    मनु (tosi) के द्वारा
    April 10, 2012

    धन्यवाद राजीव जी !

yogi sarswat के द्वारा
April 9, 2012

आदरणीय मनु जी , नमस्कार ! क्या कहूं ? समझ नहीं आ रहा ! कैसे समाज में जीते हैं हम ? क्या कसूर होता है एक लड़की का अगर वो इस दुनिया में है तो ? एक तो पैदा ही मुश्किल से होने दिया , बड़ी हुई तो ——–? मैं ज्यादा कुछ नहीं कह सकता ! माफ़ करें !

    मनु (tosi) के द्वारा
    April 10, 2012

    काश कि वो दरिंदे भी समझ सकते योगी जी ! आपकी प्रतिक्रिया हेतु धन्यवाद

    मनु (tosi) के द्वारा
    April 10, 2012

    धन्यवाद योगी जी कोई बात नहीं कभी-कभी होता है ऐसा

MAHIMA SHREE के द्वारा
April 9, 2012

इससे तो अच्छा होता कि मुझे गर्भ में ही मार दिया होता ” विछोह के दंश का अनुमान होते ही सहचरी पत्तियाँ सिसक -सिसक रो दी …… आदरणीया तोसी जी…. भाबुक कर दिया……सभी समझते है…तब भी चल रही है मानवता को कुचलेवाला ये कुत्सित कार्य … बधाई स्वीकार करे…

    मनु (tosi) के द्वारा
    April 10, 2012

    महिमा जी !पता नहीं इस दुनिया का क्या होने वाला है …आपकी प्रतिक्रिया हेतु दिल से आभारी हूँ धन्यवाद

sonam के द्वारा
April 9, 2012

नमस्कार पूनम जी जिस नन्ही सी बच्ची के दर्द को आपने अपनी कविता के माध्यम से उजागर किया है , यह कोई कल्पना नहीं है बल्कि हकीकत है , और जिस देश में इस तरह की घटनाये घट रही है उस देश का भविष्य कोई राजनेता क्या बदल सकता है ! आज इस महंगाई से ज्यादा हमे अपनी सुरक्षा की चिंता है , जिसकी शायद किसी को भी फ़िक्र नहीं ! अच्छी व विचारणीय रचना ! सादर

    मनु (tosi) के द्वारा
    April 10, 2012

    हाँ सोनम तुम ठीक कहती हो … मेरे इर्द-गिर्द कई ऐसी लड़कियां हैं जो इस तरह की स्थिति से गुजरी हैं …सच में जी करता है ऐसे दरिंदों को ज़िंदा जला दूँ । सचमुच हर बच्ची यहाँ असुरक्षित है … आपकी प्रतिक्रिया हेतु दिल से आभारी हूँ धन्यवाद

minujha के द्वारा
April 9, 2012

पूनम जी ह्रदयविदारक पीङा का मार्मिक चित्रण

    मनु (tosi) के द्वारा
    April 10, 2012

    धन्यवाद मीनू जी !

dineshaastik के द्वारा
April 9, 2012

बहुत ही मार्मिक  रचना, मन मस्तिक  को उद्देलित  करती रचना निश्चित ही सराहनीय है।

    मनु (tosi) के द्वारा
    April 10, 2012

    धन्यवाद दिनेश जी !

shashibhushan1959 के द्वारा
April 8, 2012

आदरणीय पूनम जी, सादर ! बहुत मार्मिक भाव भरी रचना !

    मनु (tosi) के द्वारा
    April 10, 2012

    नमस्कार शशीभूषण जी ! कई दिनो बाद दिखाई दिये आप?? शुक्रिया

vikramjitsingh के द्वारा
April 8, 2012

पूनम जी सादर, ये तो रोज़ की कहानी है, किसी को अक्ल नहीं आती, कि क्या कर रहे हैं? जिस की पूजा करते हैं, उसी को मार रहे हैं, कोई नहीं सोचता कि अगर ये न हों तो इंसान का असितत्व ही खत्म हो जाये…? बहुत ही सुंदर लिखा है आपने, आभार, (लगता है, हमारा ब्लॉग तो भूल ही गए आप)

    मनु (tosi) के द्वारा
    April 10, 2012

    नहीं नहीं विक्रम जीत जी ऐसी बात नहीं नेट की खराबी के कारण परेशान हु ॥ बाकी आपका धन्यवाद ॥अभी आपके ब्लॉग पर ही मिलती हु …

Rajkamal Sharma के द्वारा
April 8, 2012

आदरणीय मनु जी …… सादर अभिवादन ! लिंग अनुपात में असमानता पूरी तरह से तो नहीं लेकिन इस सबके होने के पीछे एक बड़ा कारण जरूर है ….. आपके मोहल्ले में या फिर रिश्तेदारी में अगर किसी महिला ने गर्भपात करवाया हुआ हो तो अपनी इस रचना को उसको जरूर भेंट कीजियेगा आभार सहित :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :|

    मनु (tosi) के द्वारा
    April 10, 2012

    जी बिलकुल राजकमल जी … धन्यवाद

nishamittal के द्वारा
April 8, 2012

सबसे दुखती रग को आपने अपनी भावपूर्ण रचना से व्यक्त किया है.इससे तो अच्छा होता कि मुझे गर्भ में ही मार दिया होता ” विछोह के दंश का अनुमान होते ही सहचरी पत्तियाँ सिसक -सिसक रो दी

    मनु (tosi) के द्वारा
    April 10, 2012

    आदरणीय निशा मेम, सादर नमस्कार ! आपकी प्रतिक्रिया हेतु दिल से आभारी हूँ ।आपका उपस्थित होना ही मेरे लिए फक्र की बात है । सधन्यवाद

krishnashri के द्वारा
April 8, 2012

महोदया , मार्मिक पंक्तियाँ , आज के सन्दर्भ में सत्य को दर्शाती .

    मनु (tosi) के द्वारा
    April 10, 2012

    धन्यवाद सर krishnashri जी … आपकी प्रतिक्रिया के लिए आपकी आभारी हूँ … धन्यवाद

abodhbaalak के द्वारा
April 8, 2012

आजके हैवान रोप्पी मानव के रूप को दर्शाती एक मन को विचलित करती रचना……. aise hi likhti rahen http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

    मनु (tosi) के द्वारा
    April 10, 2012

    धन्यवाद abodhbaalak जी … सादर

चन्दन राय के द्वारा
April 8, 2012

मनु जी , नारी सम्मान को समर्पित आप की हर रचना बस यूँ ही नहीं लिखी गई , इनमे गहरा चिंतन सन्दर्भ है , आपकी कविताये सवाल करती सी प्रतीत होती है , आप की रचनात्मक शैली का मई कायल हूँ

    मनु (tosi) के द्वारा
    April 10, 2012

    चन्दन जी ! आपकी प्रतिक्रिया के लिए आपकी आभारी हूँ … धन्यवाद

ashishgonda के द्वारा
April 8, 2012

जिन्होने आज उस नन्ही मासूम को कर दिया समाप्त पंखुरी-पंखुरी अलग कर उसकी नोच -नोच खा गए बहुत सुन्दर प्रसंग और पंक्तियाँ

    मनु (tosi) के द्वारा
    April 10, 2012

    धन्यवाद सुमित जी …

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
April 8, 2012

“इससे तो अच्छा होता कि मुझे गर्भ में ही मार दिया होता ” विछोह के दंश का अनुमान होते ही सहचरी पत्तियाँ सिसक -सिसक रो दी मार्मिक कविता और चित्र , स्तब्ध रह गया, बधाई,

    jlsingh के द्वारा
    April 9, 2012

    आदरणीय मनु जी, यही जगह मैं उपयुक्त पाता हूँ. आपको इस सम्वेदनशील अभिब्यक्ति में समर्थ पाता हूँ! भगवन ‘उन्हें’ सद्बुद्धि दें!

    मनु (tosi) के द्वारा
    April 10, 2012

    धन्यवाद कुशवाहा सर जी ! प्रणाम स्वीकार कीजिये मेरा …

मनु (tosi) के द्वारा
April 10, 2012

आदरणीय जवाहर भाई जी , नमस्कार ! मैं आपके जज़्बात समझती हूँ ॥आपकी प्रतिक्रिया मेरे लिए औषधी जैसी है ।आभारी हूँ आपकी धन्यवाद

मनु (tosi) के द्वारा
April 10, 2012

धन्यवाद आनंद जी !बहुत दिनो बाद दिखाई दिये आप ?कहाँ थे


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