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महिला सुरक्षा का नया फरमान - नारी हित की चाह या सुरक्षा तंत्र की नाकामी?

Posted On: 26 Mar, 2012 में

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महिला सुरक्षा का नया फरमान - नारी हित की चाह या सुरक्षा तंत्र की नाकामी?
”Jagran Junction Forum”

”जिस प्रकार से इस घटना के बाद हरियाणा पुलिस के डिप्टी कमिश्नर ने पंजाब शॉप्स एंड कमर्शियल एस्टैब्लिशमेंट एक्ट 1958 लागू कर सभी वाणिज्यिक संस्थानों को यह निर्देश जारी कर दिया कि अगर वह अपनी महिला कर्मचारियों से रात को आठ बजे के बाद काम करवाते हैं तो उन्हें पहले श्रम विभाग से इसके लिए अनुमति लेनी होगी।”


इससे तो ये कहीं नहीं लगता कि नारी के साथ होने वाली बलात्कार जैसी दुर्घटना पर कोई रोक लगेगी । हाँ इतना जरूर हो जाएगा कि जिस भी वाणिज्यिक संस्थान में कोई महिला काम करेगी,उस संस्थान यह कर्तव्य होगा कि वह सोच-समझकर अपनी महिला कर्मचारियों को रात को कार्य करने के लिए रोके। लेकिन इससे क्या यह साबित होता है कि वो दिन में सुरक्षित है । चलो हमने माना कि”कमर्शियल एस्टैब्लिशमेंट एक्ट 1958 तहत कोई वाणिज्यिक संस्थान पहले श्रम विभाग से इसके लिए अनुमति लेता है और तब वह अपनी महिला कर्मचारियों को रात में कार्य के लिए रोकता है । तब भी इस अवस्था में कोई नारी बलात्कार जैसी दुर्घटना कि शिकार हो जाती है तब क्या होगा” श्रम विभाग से तो उक्त संस्थान अनुमति ले चुका है ,इसलिए पुलिस को तो अब इससे कोई मतलब नहीं होगा इसलिए वो तो अब कुछ करेगी ही नहीं बाकी बचा उक्त संस्थान , तो क्या वह संस्थान उसकी इज्ज़त वापस लौटकर अपना कर्तव्य निभाएगा ???

ऐसा तो आसान न होगा कि वह रात में ड्यूटि करने वाली हर महिला के साथ 2-2 बॉडी गार्ड रख दे। उसपर भी क्या गारंटी है कि वही बॉडी गार्ड मौका देखते ही उस महिला के साथ बदतमीजी नहीं करेंगे।ये तो चलो रात को सड़कों पर होने वाली बलात्कार जैसी दुर्घटनाओं पर रोक लगाने के लिए हरियाणा पुलिस ने यह कदम उठाया,पर तब क्या हो अगर कोई महिला किसी वाणिज्यिक संस्थान में ही ऐसी किसी दुर्घटना की शिकार हो जाये तब !!!तब भी क्या पुलिस मौन रहेगी ??और वो क्या जब दिन -दहाड़े ,खेतों में ,गाँवो में,शहरों में,घरों में महिलाएं बलात्कार की शिकार हो रहीं हैं।

मेरठ 25 मार्च को दैनिक जागरण में एक खबर छपी कि शेरगढ़ी मौहल्ले की एक 10 साल की मासूम बालिका शाम के समय कोई सामान लाने हेतु घर से दुकान के लिए निकली जो गली के नुक्कड़ पर थी थोड़ी ही दूर चलने पर उसे गली के एक लड़के ने 10 का नोट देकर एक गुटका भी लाने का आग्रह किया तो वह उसे गुटका देने जैसे ही उसके पास गई ,उस लड़के ने उसे एक पार्क के कोने में घसीट लिया और अपने एक और साथी कि मदद से उसके हाथ-पैर बांध कर तथा मुँह में कपड़ा ठूँस कर उसका बलात्कार किया। और वहीं छोडकर उसे भाग गए । अब पुलिस कौन सा एक्ट लागू करेगी ????

बताइये कौन है ?? किससे अनुमति लेकर उस बालिका को घर के किसी आवश्यक काम के लिए निकलना चाहिए था ???
क्या आवश्यकता पड़ने पर कोई स्त्री या बालिका गली के नुक्कड़ तक भी नहीं जा सकती ?या उसके लिए भी उस महिला या बालिका को कोई बॉन्ड भर्ना होगा ?


जब ऐसे अपराध होते हैं तो तब पूरा स्त्री समाज जहां भयभीत होता है वहीं उसके मार्ग में भी अवरोध उत्पन्न हो जाता है ।

और उसका क्या जो मासूम बच्चियाँ घरों में ही यौन-शोषण का शिकार हो रही हैं कहीं दादा द्वारा कहीं चाचा द्वारा । क्या इसके लिए पुलिस को कुछ नहीं करना चाहिए ।??इसके लिए कौन सा एक्ट काम करेगा ???होना तो यह चाहिए कि पुलिस ऐसे अपराधियों के खिलाफ़ कोई ठोस कानून बनाकर कोई ठोस कदम उठाये । इन वहशी दरिंदों के लिए कोई ऐसी सजा मुकर्र की जाये जिसे देखकर -सुनकर दूसरा कोई ऐसा अपराध करने से डरे … पर नहीं हर अपराध जो स्त्री के साथ होता है उसकी सुनवाई होने के बजाय , उल्टे स्त्री पर ही दोष मढ़ दिया जाता है । बलात्कार जैसे घृणात्मक अपराध की  तो पुलिस रिपोर्ट भी एक बार में नहीं लिखती । वो अपराधी को सज़ा क्या देगी ???
इस तरह के एक्ट जहां पुलिस तंत्र कि नाकामी साबित करते हैं वहीं पर ऐसा प्रतीत भी होता है जैसे नारी के अधिकारों पर डाका डाला जा रहा हो । अधिकार के नाम पर तो वैसे ही नारी के हिस्से में कुछ नहीं आता ,ऊपर से ऐसे एक्ट लागू कर बॉन्ड भरवाकर नारी को अपाहिज महसूस कराना है। सरकार को चाहिए कि वह हर जिले की पुलिस को यह सख्ती से आदेश दे कि उनके अधिकार क्षेत्र में बलात्कार जैसा घृणित अपराध होने पर अपराधी किसी भी हालत में न बख्शा जाये बिना देरी किए निर्दोष व्यक्ति को तो न्याय मिले ही अपितु इस तरह के अपराध कि उसके क्षेत्र में पुनरावृति न होनी चाहिए ।
ये तो पुलिस या सरकार द्वारा बलात्कार जैसे अपराधों पर रोक लगाने कि मांग मेरी तरफ से थी पर हकीकत भी सभी जानते हैं कि पैसे के बल पर हर तरह के अपराधी छूट जाते हैं अगर पुलिस ईमानदारी से कोई अपराधी पकड़ कर अदालत तक पहुंचा भी दे तो पैसे और गुंडई के बल पर वो अपराधी बाइज्जत रिहा होते हैं । सारा तंत्र भ्रष्ट है ।
पुलिस तो जो करे सो करे सरकार जो करे सो करे पर एक अपील अपने जागरण जंक्शन के मंच से अपने सभी देशवासियों से है , नारी का सम्मान करें यह जीवन दात्री है। बिना इसके सृष्टि सम्भ्ब नहीं । फिर इसका इतना निरादर क्यूँ ???
घरों में, दफ्तरों में,दोस्तों में ,परिचितों में अपनों में ,बेगानों में ,रिश्तेदारी में जहां कहीं भी किसी नारी का मानसिक-शारीरिक शोषण होते देखें कृपया उसके खिलाफ़ आवाज़ उठाएँ।
किसी निरीह बालिका का बलात्कार कर के उसकी पूरी ज़िंदगी को तबाह करने वाला यदि आपका अपना पुत्र भी है तो भी ममता में अंधे न बनें उसे अपराधी मान उसके इस घृणित कार्य की सज़ा दिलवाने में आगे आयें।
उस अपने भाई ,बेटे,अपने रिश्तेदार का साथ न दें ,वह मानवता का मुजरिम है । वैसा ही कोई दरिंदा किसी दिन आपकी मासूम को रौंद डालेगा। उसे सबक सिखाइये ।क्यूंकी पुलिस या सरकार हमारे घरों में झाँकने नहीं आ सकती ,हर स्त्री को स्त्री होने के नाते मज़लूम  स्त्री का साथ तो देना ही चाहिए । वहीं एक पुरुष को एक नारी का पिता,भाई,पति,पुत्र होने के नाते हर उस दरिंदे को दंड देना चाहिए जो नारी का मानसिक या शारीरिक शोषण करने का इरादा रखता हो । तभी बलात्कार जैसी दुर्घटनाओं पर रोक लग सकती है ………… धन्यवाद !!!!



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86 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

shruti mohan के द्वारा
April 4, 2012

प्रिय मनु , आपका लेख वास्तविकता के बहोत नज़दीक है ,आपको शुभकामनायें . http://shrutimohan.jagranjunction.com/2012 shruti

follyofawiseman के द्वारा
April 4, 2012

वैसे तो मैं मूलतः कवि नहीं हूँ, किन्तु जागरण जंक्शन के कुछ कवियों से प्रेरित हो कर कविता लिखने का प्रथम प्रयास कर रहा हूँ, कविता अगर पसंद आए तो खुले दिल से मेरी सराहना कीजिएगा ताकि मैं और भी ऐसी खूबसूरत कविताएँ लिखने के लिए प्रेरित हो सकूँ……….आपका Wise Man ! ऊपर आम का छतनार, नीचे हरे घास हज़ार, और वन-तुलसी की लताएँ करने गलबहियाँ तैयार, लेके चाकू और कटार, जब हो ओलो का प्रहार, बिमला मौसी का परिवार, चुने टोकरी मे अमियाँ फिर डाले उनका आचार… यह खेल चले दो तीन महीने लगातार…. फिर आए जाड़े का मौसम, पड़े शीत की मार, छोटू को हो जाए बुखार….. डॉक्टर की दवाई फिर करे छोटू का उद्धार….. फिर आए गर्मी की ललकार, सर्वत्र मचे हाहाकार, और जब लाइट न हो और हो पंखे की दरकार, मचाए सब चीख-पुकार, चले प्रक्रिया यह बारंबार, फिर आए बसंती बहार, इस मौसम के बारे में मैं कहूँगा अगली बार…… तब तक के लिए मेरा सादर नमस्कार…..

    मनु (tosi) के द्वारा
    April 4, 2012

    नमस्कार वाइज़ मेन जी! आपने सचमुच अच्छा लिखा है … मेरी और से बधाई लीजिये

yogeshkumar के द्वारा
April 3, 2012

नमस्कार मनुजी… महिलाओं के ऊपर होने वाला जुल्म/अत्याचार कोई नयी बात नहीं है… अगर इतिहास पर गौर करें तो तमाम होने वाले युद्धों में खामियाजा महिलाओं को उठाना पड़ा है…..पहले भी तमाम देशो की सरकार ने महिला सुरक्षा के लिए तमाम कानून बनाये मगर कुछ ही कारगर हुए … अभी जिन वजहों से महिला सुरक्षा सबसे ज्यादा कारगर है वो है संचार क्रांति.. जिस तरह से पिछले कुछ दशकों से संचार क्षेत्र में क्रांति आई जैसे टीवी चैनलों की संख्या में इजाफा या इन्टरनेट क्रांति या मोबाइल फ़ोन ..इन सबसे महिलाओं को सबसे ज्यादा फायदा हुआ बजाय सरकार के किसी एक्ट से… अभी अगर महिला के साथ कुछ घटित होता है.. तो संचार क्रांति की वजह से सरकार और समाज पर एक दबाव बनता है.. इसके कुछ उदाहरण हैं.. बंगाल के बीरभूम इलाके में एक आदिवासी लड़की को नग्न घुमाने को मामला.. जिसे बाद में( लगभग ३ महीने बाद ) एक MMS की वजह से न्याय मिला.. या फिर पाकिस्तान की मुख्तारन माई जिसके साथ गाँव के पंचों ने जबरन बलात्कार का मामला हो या पाकिस्तान की हिन्दू लड़की रिंकल कुमारी जिसका जबरन धर्म परिवर्तन किया जा रहा था..या जेसिका लाल… आरुषी..या ..और भी कई नाम …ये सब मामले संचार क्रांति जी वजह से ही सामने आते है… आजकल महिलाये फ़ोन या मीडिया की वजह से ज्यादा सुरक्षित हैं.. बजाय सरकार के किसी एक्ट की वजह से… पहले तो मामले पता भी नहीं चलते थे और महिलाएं घुट-घुट के जीने को विवश थी.. वहीँ जहाँ से फ़ोन से कुछ फायदे हुए हैं.. इनसे समस्या भी हुई… बहुत से MMS कांड भी सामने आये हैं ..और आते जा रहे हैं… सबसे बुरा हाल बिहार, झारखण्ड, बंगाल, आसाम की आदिवासी और पिछड़े इलाकों का हैं…. जहाँ से मजबूर लड़कियों की तस्करी तक हो रही है… इस बारे में मिडिया को, समाज को सरकार पर और भी दबाव बनाने की जरूरत है… खैर इस बारे में लिखने को बहुत कुछ है… मगर कमेन्ट तौर पे इतना ही… मार्मिक और दर्द भरे लेख के लिए और ब्लॉगर ऑफ़ दे वीक के लिए बधाई…..

    मनु (tosi) के द्वारा
    April 4, 2012

    योगेश जी सादर नमस्कार ! आप सही कह रहे हैं … काफी कुछ बदलाव तो है पर वो इतना नहीं की इस पर संतुष्ट हुआ जा सके । रोड पर होने वाला बलात्कार तो एक बार दिख भी जाता है । पर उनका क्या जो मासूम बच्चियाँ घरों मे ही अपनों द्वारा ही यौन शोषण का शिकार हो रही हैं … एक बार को बड़ी लड़की या महिला के साथ हो तो वो अपनी हिम्मत जूटा कर इस ज़ुल्म के खिलाफ लड़ सकती है । पर उन मासूमों का क्या जिन्हे कुछ पता नहीं । जिनकी पूरी ज़िंदगी नरक के समान बीतती है … अब आगे आना ही होगा … आपकी प्रतिक्रीया हेतु धन्यवाद ।

Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
April 2, 2012

मनु जी, सादर अभिवादन !! जन- मानस के बीच समस्या के साथ -साथ समाधान भी आपने रखा है | आदमी का रक्त जब गन्दा हो जाये तो उसे बदला या शोधित किया जा सकता है पर जब आदमी की आत्मा ही गंदी हो जाये तो उसका एक ही इलायज़ है, देह- परिवर्तन ! समसामयिक व ज्वलंत आलेख के लिए बधाई !!

    मनु (tosi) के द्वारा
    April 4, 2012

    आचार्य जी , सादर नमस्कार ! आपकी प्रतिक्रीया हेतु धन्यवाद ।आभारी हूँ आपको लेख पसंद आया

akraktale के द्वारा
April 1, 2012

मनु जी, कुछ देर से सही, आपको ब्लोगेर ऑफ़ द वीक बनने के लिए हार्दिक बधाई.

    मनु (tosi) के द्वारा
    April 2, 2012

    dhanywad Ashok ji !aapki abhari hun

Bhupendra singh Litt के द्वारा
April 1, 2012

विवेचना करने की अच्छी कोशिश है | लेकिन एक बात समझ में नहीं आती, आखिर वो कौन सी वजह है जिसके कारण ऐसी शर्मनाक घटनाये होती है ? लोग पोलिस – प्रशासन की नाकामी को बताकर वाहवाही लूटने की कोशिश करते हैं , लेकिन मूल-जड़ तक जानने , समझाने की कोशिश बहुत ही कम लोग करते है | हमारे समाज और इन घृणित अपराधों के बीच एक ऐसी साजिश रची जा रही है , जो बंद आँख से दिखाई नहीं देती है | और इस साजिश का परिणाम है – बढते अपराध और अमीर होते कुछ लोग | अन्यथा नारी का जो सम्मान भारत में था और आज भी है , वो पुरे विश्व में कहीं भी नहीं है | भारत दुनिया का अकेला ऐसा देश है जहाँ नारी को ‘देवी ‘ कहा जाता है | आज गुरु नानक देव जी का दोहा याद आता है कि- बुरा देखन मै चला , बुरा ना मिलियो कोय ; मन जो आपणा खोजा , तो मुझ से बुरा ना कोय |

    मनु (tosi) के द्वारा
    April 2, 2012

    aapki pratikriya ke liye abhari hun Bhupendra singh !thanks

surendra shukla bhramar5 के द्वारा
March 31, 2012

मनु जी बड़े अच्छे सवालात और विवेचना आप की . काश ऐसा हो सके तंत्र जागे ..भय भागे आत्म बल बढे लोगों में नेताओं से डर पुलिस भी निकम्मी न रहे … . सरकार को चाहिए कि वह हर जिले की पुलिस को यह सख्ती से आदेश दे कि उनके अधिकार क्षेत्र में बलात्कार जैसा घृणित अपराध होने पर अपराधी किसी भी हालत में न बख्शा जाये बिना देरी किए निर्दोष व्यक्ति को तो न्याय मिले ही अपितु इस तरह के अपराध कि उसके क्षेत्र में पुनरावृति न होनी चाहिए । सार्थक लेख बधाई बेस्ट ब्लागर के लिए भ्रमर ५

    मनु (tosi) के द्वारा
    April 2, 2012

    सुरेन्द्र जी , aap sahi kah rahe hain apradhi waqai nahi bakshe jaane chahiye… धन्यवाद

sinsera के द्वारा
March 31, 2012

manu ji, congrats for this another feather in ur cap. actually no act or law can work in this case.girls should make themselves strong to fight against the evil.

    Santosh Kumar के द्वारा
    March 31, 2012

    तोशी जी ,हार्दिक बधाई और ढेरों शुभकामनाये

    मनु (tosi) के द्वारा
    April 2, 2012

    आदरणीय सरिता जी , नमस्कार! आप सही कह रही हैं पर जब बात अबोध बालिकाओं की हो तो बड़ा मुश्किल होता है …thanks for the compliment

चन्दन राय के द्वारा
March 31, 2012

मनु जी , सर्वश्रेष्ठ ब्लॉगर बनने के लिए बहुत बहुत बधाई बहुत अच्छी रचना.

    मनु (tosi) के द्वारा
    March 31, 2012

    धन्यवाद चन्दन जी !

dineshaastik के द्वारा
March 31, 2012

पूनम जी सर्वश्रेष्ठ ब्लॉगर ऑफ दा वीक बनने की बधाई…

    मनु (tosi) के द्वारा
    March 31, 2012

    धन्यवाद दिनेश जी !

Sumit के द्वारा
March 30, 2012

सुंदर रचना साथ में बेस्ट ब्लॉगर बनने की हार्दिक बधाई ….

alkargupta1 के द्वारा
March 30, 2012

मनु जी , सारगर्भित व सशक्त आलेख. सप्ताह की सर्वश्रेष्ठ ब्लॉगर का सम्मान प्राप्त होने के लिए हार्दिक बधाई !

    मनु (tosi) के द्वारा
    March 31, 2012

    धन्यवाद मेम (अल्का जी ) आपकी आभारी हूँ

drarvinddubey के द्वारा
March 30, 2012

ठीक कहा आपने पर एक बात और विचारणीय है क्या वह नारी जिसके साथ बलात्कार हुआ है वह क्या ऐसी घटनाओं के खिलाफ खुद आवाज उठाती है क्या कभी सबके सामने खड़े होकर बेवाकी से कहती है कि यही है वह दरिंदा, इसको पकड़ो. इसके विपरीत जैसे ही ऐसा कुछ होता है तो खुद वह महिला, उसके परिवार वाले, नातेदार-रिश्तेदार मिलकर मामले को दबाने की फ़िराक में लग जाते हैं. कभी- कभी तो जाँच तक में सहयोग नहीं करते . कौन जिंदगी भर के लिए कलंक का टीका माथे पर लगवाये आज भी मूलत:हमारा समाज ही इसमें स्त्री का दोष ही देखता है “उसे ऐसे कपडे नहीं पहनने चाहिए थे, ऐसे नहीं करना चाहिए था, ऐसे नहीं चलना चाहिए था, इस समय घर से नहीं निकलना चाहिए था आखिर क्यों? दरअसल यह सुरक्षा तंत्र की नहीं सामाजिक तंत्र की नाकामी है जब तक स्त्रियाँ ही ऐसे मामलों को कलंक की तरह लेती रहेंगीं, एक दुर्घटना की तरह नहीं लेंगीं; तब तक तस्वीर बदलने वाली नहीं है सिर्फ सरकार और शाशन तंत्र को कोसने से क्या होगा? क्या सरकार के लिए यह संभव है कि हर महिला को व्यक्तिगत सुरक्षा मुहैया करा सके? यह ताकत महिलाओं को आपने आप में खुद पैदा करनी होगी, मानसिक स्तर पर और शारीरिक स्तर पर भी जिसमे लड़कियों का स्व सुरक्षा के उपाय सिखाना भी शामिल हो सकता है. सही मुद्दे पर उंगली रखने के लिए आपका धन्यवाद, सम्मान के लिए बधाई. जागरण जंक्शन के इसी मंच पर इसी सोच को लेकर (बलात्कार के प्रति समाज के इसी नजरिए को इंगित करती) मेरी एक कविता के “ग्लानि बोध” (http://drarvinddubey.jagranjunction.com/2011/04/08/6/) नाम से प्रकाशित है अगर समय मिले तो उसे जरुर पढिये और अपनी प्रतिक्रिया दीजिये, अरविन्द दुबे

    मनु (tosi) के द्वारा
    March 31, 2012

    धन्यवाद अरविंद जी!

yamunapathak के द्वारा
March 30, 2012

MANUJI बहुत-बहुत बधाई

    मनु (tosi) के द्वारा
    March 31, 2012

    धन्यवाद यमुना जी !

March 29, 2012

पढ़ने के बाद लगा कि ठीक-ठीक मैं भी कुछ ऐसा ही सोचता रहा हूं। लेकिन ये यकीन के साथ कह सकता हूं कि इतनी मारकता के साथ कतई नहीं लिख पाता।

    मनु (tosi) के द्वारा
    March 31, 2012

    अकबर जी आपको मैंने पढ़ा है आपके जैसा शायद ही मैं लिख पाऊँ बस कोशिश भर करती हूँ … आपकी प्रतिक्रिया हेतु दिल से आभारी हु धन्यवाद …

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
March 29, 2012

देखा मनु जी, संतुलित लेख लिखने का नतीजा. एक हफ्ता टंगे रहना है. बधाई.

    मनु (tosi) के द्वारा
    March 31, 2012

    सादर धन्यवाद सर जी !

jlsingh के द्वारा
March 29, 2012

मनु जी! सप्ताह का सर्वश्रेष्ठ ब्लॉगर बनने के लिए बहुत बहुत बधाई!!!!! वैसे यह आलेख काफी सशक्त था, आपको यह सम्मान मिलना ही चाहिए!

    मनु (tosi) के द्वारा
    March 31, 2012

    जवाहर भाई जी नमस्कार ! सब आप सबके हौसले प्रदान करने की बदौलत है। भाई जी !सादर धन्यवाद !!

prateekraj के द्वारा
March 29, 2012

मनु जी! सप्ताह का सर्वश्रेष्ठ ब्लॉगर बनने के लिए बहुत बहुत बधाई

    मनु (tosi) के द्वारा
    March 31, 2012

    प्रतीक जी धन्यवाद …

minujha के द्वारा
March 29, 2012

पूनम जी मंच पर सप्ताह की क्वीन का ताज मुबारक हो (आप ही की भाषा में),बहुत बहुत बधाई

    मनु (tosi) के द्वारा
    March 31, 2012

    धन्यवाद मीनू जी !

tejwanig के द्वारा
March 29, 2012

मन को छू जाने वाली पोस्ट है, बधाई

    मनु (tosi) के द्वारा
    March 29, 2012

    धन्यवाद सर (tejwanig जी )

astrobhadauria के द्वारा
March 29, 2012

बहुत अच्छा लिखा है ह्रदय स्पर्शी कथन है,समाज को सोच कर फ़ैसला करना चाहिये,दोषी कौन है,नर या नारी ?

    मनु (tosi) के द्वारा
    March 29, 2012

    धन्यवाद astrobhadauria जी

Jayprakash Mishra के द्वारा
March 29, 2012

मनु जी , इससे अच्छी महिलाऒं की स्थित तो राजतंत्र में थी.

    मनु (tosi) के द्वारा
    March 29, 2012

    जी बिलकुल ठीक कहा आपने धन्यवाद जयप्रकाश जी !………

vikramjitsingh के द्वारा
March 29, 2012

मनु जी, सादर, ”छोटी सी उम्र में लग गया रोग…..” कितनी बार कहा है, इतना अच्छा मत लिखो…..मत लिखा करो……. अब भुगतो……. अब टांग दिया ना दीवार पर………..डिब्बी मैं बंद करके…….पूरा एक हफ्ता यहीं पर लटके रहोगे……. ढेर सारे कमेन्ट के जवाब देने पड़ेंगे…….वो अलग से…….खैर, अब कुछ नहीं हो सकता….. चलो, कोई बात नहीं, हौंसला रखो, ये दिन भी निकल ही जायेंगे, एक फायदे की बात बताते हैं, हमारी तरफ से बधाई ले लो,…..कुछ आराम मिलेगा………. Congratulations…….Manu Ji……

    मनु (tosi) के द्वारा
    March 29, 2012

    हा हा हा !नमस्कार विक्रम जीत जी ! और धन्यवाद भी

    vikramjitsingh के द्वारा
    March 29, 2012

    प्रिय तमन्ना जी, ‘जंक्शन के फेसबुक’ नहीं होता.. ‘जंक्शन के फेसबुक अकाउंट’ होता है….

    Tamanna के द्वारा
    March 29, 2012

    विक्रमजीत सिंह जी… मांफ कीजिएगा…. फेसबुक अकाउंट बोलना चाहिए था.. पर क्या करू.. जबान पर सिर्फ फेसबुक ही चढ़ा हुआ है.

    मनु (tosi) के द्वारा
    March 29, 2012

    धन्यवाद तमन्ना जी ….

Jamuna के द्वारा
March 29, 2012

तोशी जी नमस्कार स्वीकर करें. ब्लॉगर ऑफ द वीक बनने पर आपको बधाई http://jamuna.jagranjunction.com/

    मनु (tosi) के द्वारा
    March 29, 2012

    धन्यवाद जमुना जी ………

sonam के द्वारा
March 29, 2012

congratulation punam ji for become blogger of the week.

    मनु (tosi) के द्वारा
    March 29, 2012

    धन्यवाद सोनम जी ….

nishamittal के द्वारा
March 29, 2012

सुन्दर सन्देश के लिए साधुवाद.सम्मान के लिय्रे बधाई

    मनु (tosi) के द्वारा
    March 31, 2012

    धन्यवाद मेम (निशा जी )!

yogi sarswat के द्वारा
March 29, 2012

तोशी जी नमस्कार ! ब्लॉगर ऑफ़ दी वीक बनने पर हार्दिक बधाई !

akraktale के द्वारा
March 28, 2012

पूनम जी नमस्कार, वाणिज्यीक संस्थानों पर महिलाओं सम्बन्धी क़ानून लागू करा कर, पंजाब सरकार से एक अच्छा कार्य किया है. हाँ मगर हम इसको जब यौनशोषण जैसी घ्रणित घटनाओं से जोड़कर देखते हैं तो ये बहुत ना काफी है.आपने सही कहा है आवश्यकता तो एक मजबूत क़ानून बनाने की है. इसमें मै यह भी जोड़ना चाहता हूँ की इस तरह के मुजरिमों से निपटने के लिए विशेष न्यायालय बनाए जाएँ ताकि दोषी को सजा भी शीघ्र दी जा सके इससे महिला या उसके घर वालों पर जो दबाव बनाया जाता है जिसके कारण बयान बदलना पड़ता है और मुजरिम आसानी से छुट जाता है वह भी नियंत्रित होगा. ऍफ़ आई आर ऑन लाइन लिखी जाने की व्यवस्था को शीघ्रता से पूर्ण किया जाए तथा चिकित्सकीय जांच भी एक निर्धारित समय में होने की जवाबदारी पुलिस की सुनिश्चित की जाए. और सबसे महत्वपूर्ण बात यह की हम समाज में ही सुधार लाने का प्रयास करें. जहां हम छोटी छोटी बातों पर बंद या अन्य किसी तरह का आन्दोलन करने खड़े हो जाते हैं वहीँ हम आज तक इंटरनेट के माध्यम से परोसी जा रही गंदगी पर कभी कोई बंद नहीं करा पाए. विषय गंभीर है और इससे निपटने के लिए एक नहीं अनेक रास्ते बंद करना होंगे तभी जा कर हम कामयाब हो पायेंगे.

    मनु (tosi) के द्वारा
    March 31, 2012

    नमस्कार अशोक जी ! जी बिलकुल सही फरमाया आपने इस विषय पर अब सोचने से नहीं बल्कि कुछ करने से काम चलेगा। और इसकी शुरुआत मैं कर चुकी हूँ बस आप लोग साथ दीजिये ।

prateekraj के द्वारा
March 27, 2012

मनु जी, आपकी बात सही है बुराई की जडें हमारे समाज में बहुत गहरी हो गयी हैं. इससे छुटकारा शायद सभी को और सही शिक्षा पहुचकर ही मिल पायेगा.और वो भी तब जब सभी किताबों में लिखे ज्ञान को अपने जीवन में अपनाये जो कि आजकल लोगो के लिए कर पाना बहुत ही मुश्किल हो रहा है.

    मनु (tosi) के द्वारा
    March 29, 2012

    धन्यवाद prateekraj जी ……

yogi sarswat के द्वारा
March 27, 2012

बताइये कौन है ?? किससे अनुमति लेकर उस बालिका को घर के किसी आवश्यक काम के लिए निकलना चाहिए था ??? क्या आवश्यकता पड़ने पर कोई स्त्री या बालिका गली के नुक्कड़ तक भी नहीं जा सकती ?या उसके लिए भी उस महिला या बालिका को कोई बॉन्ड भर्ना होगा ? तोशी जी नमस्कार ! पहले तो इतना गंभीर विषय , लिखने का धन्यवाद ! असल में ऐसे लेख लिखने के लिए बड़ी हिम्मत चाहिए होती है क्योंकि आप एक सामाजिक दोष पर लिख रहे हैं , आपने बहुत बढ़िया सवाल उठाये हैं ! व्यक्तिगत रूप से मानता हूँ की ऐसे घिनोने कृत्य करने वालों के लिए जीतनी कठोर से कठोर सजा हो सके मिलनी चाहिए क्योंकि ये घटनाएं दिन प्रतिदिन बढती ही जा रही हैं !

    मनु (tosi) के द्वारा
    March 29, 2012

    धन्यवाद योगी जी ! आप भी जो लेख लिखते हैं वाकई वो, कबीले-तारीफ होते हैं …

March 26, 2012

कितनो को सजा दिलवायेंगी आप! और भला पुलिस हर किसी को सजा क्यों देगी? क्या वो हम दरिंदो की श्रेणी में नहीं आते? क्या वो आसमान के फ़रिश्ते हैं जो हमसे भिन्न होंगे? आज जरुरत है मानसिक विकृति और गन्दी मानसिकता में बदलाव की जिसके कारण आये दिन हमारी माँ और बहने इसका शिकार हो रही है और गुनाहगार भले ही कोई एक हो पर दोषी हम सभी हैं. हममे से बहुत लोग अपनी माँ-बहन के अलावा किसी और की माँ-बहन को माँ बहन नहीं समझते. उनमें से मैं भी एक हूँ और इस हकीकत से इंकार नहीं करूँगा . पर कुछ लोग ऐसे हैं जो खुद की माँ-बहन को भी नहीं छोड़ते. पर वो हमसे अच्छे हैं क्योंकि सभी औरत जाति को एक नज़र से देखते हैं. गुनाहगार तो हम जैसे लोग हैं जो औरत को दो नज़रों से देखते हैं और ऐसे लोगों की बाहुल्यता हैं. मैं चाहता तो इन बातों का उल्लेख अपने आलेख में कर सकता हूँ पर मैं अधिकतर कमेन्ट में करता हूँ और अपने आलेखों में एक प्रश्न छोड़ जाता हूँ विचार और चिंतन के लिए. कमेन्ट में इस लिए क्योंकि विचारों के आदान प्रदान से हम अच्छी तरह से बातें एक-दुसरे के सामने रख सकते हैं. मैं जानता हूँ कि मेरी बातें लोगो को अजीब लगती हैं. लोग मुझे पागल, सनकी और आक्रोशित स्वभाव वाले बुलाते हैं . पर मैं जो कुछ भी कहता हूँ सोच समझकर, बहुत ही शांत स्वभाव से कहता हूँ. यह अलग बात हैं कि मेरा बात रखने का लहजा थोडा अजीब होता है और हकीकत हमेशा अजीब ही होती है……..अपना कितना भी गुनाहगार क्यों न हो? कोई नहीं चाहेगा कि उसको सजा हो, उसे सामने वाला ही गलत नज़र आएगा…यह बात मैं सच के धरातल पर खड़ा होकर कह रहा हूँ……मैं दूसरों कि नहीं जनता मैं खुद स्वीकार कर रहा हूँ कि मैं गुनाहगार हूँ क्योंकि उन सब में, मैं भी शामिल हूँ और साथ ही मैं इस गुनाह की सजा पाने को भी तैयार हूँ और साथ में यह भी बोलता हु कि मुझे खुले आसमान के निचे ऐसी सजा दी जाय जैसी की आज तक किसी को नहीं दी गया हो……बहुत मजा आएगा…..देखताहूँ, कितने लोगों की मानसिकता आप बदल पाती हैं……पर मुझे सजा देने वाला वो शख्स होना चाहिए जो आज तक किसी बहन बेटी को गलत नज़र से नहीं देखा हो……और हाँ उस शख्स से उसकी शराफत का प्रमाण नहीं मागुंगा…..बस वो शख्स हजारों के बिच में मुझे सजा देने के लिए आ जाये. आखिर मैं भी देखना चाहता हूँ कि वो कैसा होगा……………………

    jlsingh के द्वारा
    March 26, 2012

    …………..लेकिन जो पापी न हो वो पहला पत्थर मारे! अनिल जी, आपके अन्दर एक ज्वालामुखी धधक रही है. पता नहीं कब फट जाय! आपने बेबाकी से अपनी राय रखी है, जो कि सच्चाई के बहुत करीब है. महिलाओं, मासूमों पर अत्याचार होते रहे हैं और पता नहीं कब तक होते रहेंगे. पर त्वरित और इमानदार इन्साफ, कड़ी सजा, इसमें कमी लाने में सहायक जरूर सिद्ध होगी. पर इसे अमल में लायेगा कौन? जबतक महिलाएं खुद मजबूत न बनेंगी….. कमजोर को ही तो सब सताते हैं.मनु जी ने बहुत ही विस्तार पूर्वक अपनी बात राखी है हम उनका आदर करते हैं और उनके आह्वान को स्वीकार करते हैं.

    dineshaastik के द्वारा
    March 27, 2012

    अनिल जी आप जो कह रहे है वह आदर्श राज्य की कल्पना है। आपकी सोच की तरह न तो यह धरती कभी हुई है और न संभवतः कभी हो सकती है। राम राज्य में भी ऐसा नहीं हो सका। ऐसी बातें बड़ी मनमोहक एवं काल्पनिक आनन्द प्रदान करती हैं। किन्तु सत्य के धारतल पर विलुप्त  हो जाती हैं। जैसा आप सोचते हैं वैसे तो शायद(शायद क्या निश्चित ही) ईश्वर भी नहीं हो सकते। तुलसी और विष्णु जी का मिथक सर्व विदित है। शिव जी का विष्णु के मोहनी रूप पर मोहित होना। आदि अनेक उद्धरण हैं। अनिल जी काल्पनिक दुनियाँ से निकलिये। सत्य की धरा पर पदार्पण कीजिये। मैं भी कभी ऐसी कल्पनायें करता था, लेकिन तब बच्चा था। संभवताः 8-10 साल का।शनैः शनैः बड़ा हुआ और सत्य का भान हुआ।    महत्वपूर्ण यह है कि हम (यदि कर सकते हैं तो) लोगों को जागरूप कैसे करे। समाज को सुसंस्कृत  कैसे बनायें।     पूनम जी जो समाधान सुझाये हैं हम सार्थक हैं। यदि उन सुझावों को मान्यता मिले तो निश्चित ही इस भयावह समस्या पर कुछ सीमा तक नियंत्रण में किया जा सकता है।    इसमें कुछ और सुझाव सम्मलित किये जा सकते हैं- 1.जिस क्षेत्र में बलात्कार जैसी घटना हो, वहाँ के जिम्मेदार ऑफिसर पर भी कार्यवाही की जाय। 2. केश को शीघ्र सुलझाकर 3 माह के अंदर बलात्कारी को फाँसी से कम सजा न मिले। 3.छेड़छाड़ करने वाले का  सार्वजनिक सामाजिक बहिष्कार हो। 4. नारी को बेटी, बहिन, पत्नि, माँ आदि सभी रुपों में सम्पत्ति का समान अधिकार प्राप्त हो। 5. मेरा बलात्कार हुआ कहने को ही एफ. आई. आर. मान लिया जाय। 6.पी़ड़िता के बयान एवं मेडीकल रिपोर्ट को ही सजा का आधार बनाया जाय।

    dineshaastik के द्वारा
    March 27, 2012

    कृपया टाइपिंग की अशुद्धि पर ध्यान न दें-  जैसे–पूनम जी जो उपाय सुझाये हैं हम सार्थक हैं कि  जगह पूनम जी ने जो उपाय सुझाये है, वे सार्थक हैं…आदि..

    March 27, 2012

    दिनेश जी, यक़ीनन रामराज की परिकल्पना आप ८-१० साल के उम्र में सोचते होंगे क्योंकि मैं भी उसी उम्र में सोचता था. हमारी विचारधारा काफी हदतक एक दुसरे से मिलती हैं. इसलिए मैं इस हकीकत से भलीभांति वाकिफ हूँ. मैं बिलकुल जमीनी हकीकत पर रहकर बातकर रहगा हूँ. पर मैं जो कहना चाह रहा हूँ वो बिलकुल समझ नहीं पायें हैं. एक बात कहना चाहूँगा कि आप जैसे विचारक से यह उम्मीद नहीं थी. आप जिस समाधान की बात कर रहे हैं, मैं उसका विरोध नहीं कर रहा हूँ पर मैं जिस समस्या का बात कर रहा हूँ वो आप समझ नहीं पा रहें हैं….एक बार अपना समाधान भूलकर, मेरी बातों पर चिंतन करिए. आपको जवाब मिल जायेगा क्योंकि मेरे और आपके चिंतन का परिणाम अलग नहीं हो सकता. यह मैं भलीभांति जानता हूँ…….लगता हैं आज कल आप दूसरों की तरह चिंतन और मनन करना अभिशाप समझ रहे है………आपका और हमारा साथ बने रहे क्योंकि आनेवाले समय में दोनों का साथ जरुरी हैं. यह बात मैं दुबारा कह रहा हूँ. दिनेश जी आप खुद को भूल सकता हैं मैं आपको नहीं भुलसकता की आप कौन हो ? यह एक रहस्य है ? जिसे सिर्फ समय ही साल्व कर सकता है….

    मनु (tosi) के द्वारा
    March 29, 2012

    धन्यवाद अनिल जी! आपकी प्रतिक्रिया मेरे लिए अनमोल है । बस मेरा तो ये मानना है कि हम बदलेंगे तो जग बदलेगा … शुरुआत खुद से ही करनी होगी

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
March 26, 2012

आदरणीया मनु जी. सादर आपके लेख की खासियत होती है की प्रश्न के साथ सुझाव भी होते हैं. बधाई.

    मनु (tosi) के द्वारा
    March 29, 2012

    धन्यवाद सर जी !आपकी प्रतिक्रिया मुझ में स्फूर्ति का संचार करती है और कुछ अच्छा लिखने को प्रेरित करती है । ये तो पता नहीं इसमें कितनी सफल हो पाती हूँ पर कोशिश तो जरूर करती हूँ ।

minujha के द्वारा
March 26, 2012

आलेख के अंत में अच्छा संदेश दिया है आपने पूनम जी यही समय की मांग है,बहुत अच्छा

    मनु (tosi) के द्वारा
    March 29, 2012

    आदरणीय मीनू जी , नमस्कार ! जी आस-पास होने वाली घटनाएँ विचलित करती हैं तब महसूस होता है की हमारा भी कुछ कर्तव्य है …

RAJEEV KUMAR JHA के द्वारा
March 26, 2012

यथार्थपरक आलेख पूनम जी.

    मनु (tosi) के द्वारा
    March 29, 2012

    धन्यवाद राजीव जी !

yamunapathak के द्वारा
March 26, 2012

satya kahaa ye sab kee zimmedaaree है बेहद विचारणीय लेख

    मनु (tosi) के द्वारा
    March 29, 2012

    धन्यवाद यमुना जी …

मनु (tosi) के द्वारा
March 29, 2012

धन्यवाद ! जवाहर भाई जी ………. बस आप लोगो का साथ चाहिए …

मनु (tosi) के द्वारा
March 29, 2012

धन्यवाद दिनेश जी ………. आपने मेरे लेख की सारी कमी पूरी कर दी।

मनु (tosi) के द्वारा
March 29, 2012

thank u Anil ji …………

मनु (tosi) के द्वारा
April 2, 2012

संतोष जी ! धन्यवाद

मनु (tosi) के द्वारा
April 4, 2012

सुमित जी हाई सोसायटी नहीं ये बुराई हर जगह पर है


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