मेरे विचार आपके सामने

नया सफर नई दिशा

32 Posts

833 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 9515 postid : 66

क्या इस रात की सुबह होगी ?........(contest)

Posted On: 20 Mar, 2012 में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

99999999

क्या इस रात की सुबह होगी ( Contest )

———————————————

भारत में राजनैतिक एवं नौकरशाही का भ्रष्टाचार बहुत ही व्यापक है। किन्तु इसके अलावा न्यायपालिका, मिडिया, सेना, पुलिस आदि में भी अकल्पनीय भ्रष्टाचार व्याप्त है।
वर्ष 2008 में दी गई ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल की रिपोर्ट ने बताया है कि भारत में लगभग 20 करोड़ की रिश्वत अलग-अलग लोकसेवकों को (जिसमें न्यायिक सेवा के लोग भी शामिल हैं) दी जाती है। उन्हीं का यह निष्कर्ष है कि भारत में पुलिस और कर एकत्र करने वाले विभागों में सबसे ज्यादा भ्रष्टाचार है। आज यह कटु सत्य है कि किसी भी शहर में नगर निगम में पैसा दिए बगैर कोई मकान बनाने की अनुमति नहीं मिलती। इसी प्रकार सामान्य व्यक्ति भी यह मानता चलता है कि किसी भी सरकारी महकमे में पैसा दिए बगैर गाड़ी नहीं चलती।अंग्रेजों ने भारत के राजा महराजाओं को भ्रष्ट करके भारत को गुलाम बनाया। उसके बाद उन्होने योजनाबद्ध तरीके से भारत में भ्रष्टाचार को बढावा दिया और भ्रष्टाचार को गुलाम बनाये रखने के प्रभावी हथियार की तरह इस्तेमाल किया। देश में भ्रष्टाचार भले ही वर्तमान में सबसे बड़ा मुद्दा बना हुआ है, लेकिन भ्रष्टाचार ब्रिटिश शासनकाल में ही होने लगा था जो हमारे राजनेताओं को विरासत में दे गए थे।

सरकार भ्रट हो तो जनता की ऊर्जा भटक जाती है। देश की पूंजी का रिसाव हो जाता है। भ्रष्ट अधिकारी और नेता धन को स्विट्जरलैण्ड भेज देते हैं।इस सिलसिले को अब रोकना बहुत ज्यादा जरूरी हो गया है. अंग्रेजो ने हमारे भारत पर करीब 200 सालो तक राज करके करीब 1 लाख करोड़ रुपये लूटा.मगर आजादी के केवल 64 सालों में हमारे भ्रस्टाचार ने 280 लाख करोड़ लूटा है. एक तरफ 200 साल में 1 लाख करोड़ है और दूसरी तरफ केवल 64 सालों में 280 लाख करोड़ है. यानि हर साल लगभग 4.37 लाख करोड़, या हर महीने करीब 36 हजार करोड़ भारतीय मुद्रा स्विस बैंक में इन भ्रष्ट लोगों द्वारा जमा करवाई गई है।

666

भ्रष्टाचार एक ऐसा मुद्दा है जिस पर जितना सोचा जाए ,कहा जाए ,बहस की जाए कम है ।क्या हम वाक़ई भ्रष्टाचार जैसे मुददे पर गंभीरता से सोचते हैं । मुझे लगता है नहीं ??? क्यूंकी जब हम अपने बच्चों से ही किसी काम को कहते हैं मसलन उनके फायदे  के लिए भी ,जैसे पढ़ने भर के लिए भी कहते हैं तो लगभग हर माँ- बाप उसे ‘घूस ‘ देकर पढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं ,जैसे बेटा तुम अच्छा पढ़ोगे ,और अच्छे अंक लाओगे तो तुम जो चाहोगे वो हम दिलवाएँगे । इसी आदत (लालच ) का शिकार बच्चे भी अपने माँ-बाप पर दबाव बनाते हैं, अगर मैं ये डिवीजन ले आऊँ या इतने अंक ले आऊँ तो आप मुझे क्या दोगे ? इसके अलावा अक्सर माँ-बाप अपनी मर्ज़ी का कोई भी छोटा -मोटा काम कराने तक की रिश्वत अपने बच्चों को देते हैं । ये इनाम नहीं है । इनाम किसी भी कार्य को कराने के लिए नहीं दिया जाता, बल्कि वो तो कोई भी अच्छा कार्य सम्पन्न होने के उपरांत बच्चों को दिया जाता है।ये क्या रिश्वखोरी नहीं है क्या हम अपने बच्चों में भी रिश्वत खोरी या भ्रष्टाचार की नीव बचपन में ही मजबूत नहीं करते ??? जब वही बच्चा बड़ा होकर किसी भी कार्यालय में किसी भी पद पर पहुंचता है ,जो  किसी भी काम के लिए ‘कुछ ‘ पाने का आदी  है , वह क्या वहाँ पर कुछ पाने की इच्छा नहीं रखेगा ?रखेगा !!!या यही बच्चा बड़ा होकर जब नेता बन देश कि बागडोर संभालेगा तो क्या -क्या नहीं करेगा रिश्वत का तो वह पहले से ही आदी है और अपने जैसे ही किसी और व्यक्ति से मिल नए नए अपराध भी करेगा पैसे में नशा होता है और निरंकुश ताकत भी,जिसका वो अनुचित उपयोग करेगा । तो फिर देश को कौन बचाएगा । देश का तारणहार ही देश डुबो देगा जैसा कि होता आया है ।
जब हम अपने बच्चों को रिश्वत खोरी बचपन में ही सीखा देते हैं । तो हम उनसे कैसे उम्मीद करेंगे कि वह भी अपने काम के लिए रिश्वत न  देगा न लेगा । फिर हम सब दूसरों को दोष क्यूँ देते हैं ।क्यूँ सरकार कि कोसते हैं लोग तो रिश्वत तभी लेंगे न जब हम देंगे । भ्रष्टाचार को रोकने के लिए ईमानदारी से गहन विचार-विमर्श की ही आवश्यकता नहीं वरन इस बात पर भी गौर किया जाए कि इसकी शुरुआत कहाँ से होती है । जब इसकी शुरुआत पर ही रोक लगेगी तभी इसे बढ्ने से रोका जा सकता है । एक -दूसरे से अच्छा पहनने की होड ,हर सुविधा-सम्पन्न ज़िंदगी जीने कि होड़ इंसान को रिश्वत लेने पर मजबूर करती है । धनवान व्यक्ति धन देकर अपना काम निकाल लेता है । धनवान व्यक्ति से धन कि रिश्वत पाने वाला व्यक्ति अपने पद के महत्त्व को समझ जाता है और फिर वह हर वर्ग से धन पाने कि इच्छा रखता है इससे भी भ्रष्टाचार पनपता है । अंत में सिर्फ इतना ही कि अनशन करने या लोक बिल पारित होने से  देश का बेड़ा पार होने वाला नहीं । इससे न तो कालधन वापस आएगा न ही भ्रष्टाचार रुकेगा । इसकी शुरुआत हमे बच्चों से करनी होगी ।हमें अपने बच्चों को बिना रिश्वत के काम करने कि शिक्षा देनी होगी । इन्हे सिखाना होगा कि रिश्वत लेना और देना दोनों ही घोर अपराध हैं जिनका  कोई पश्चताप नहीं । भ्रष्टाचार से धनवान और धनवान होता चला जाता है और गरीब और गरीब । जिन गरीब लोगों के पास धन नहीं है रिश्वत देने के लिए उन भ्रष्ट लोंगों (अफसरों )को ,जो सरकार द्वारा भेजी गई व्रद्धावस्था पेंशन देंगे , वो आसानी से पेंशन नहीं पा  पाते। वो बेचारे गरीब वृद्ध अपनी पेंशन पाये बिना दफ़्तरों के चक्कर काट-काट कर भूख से मर जाते हैं । देश की 80% जनता गरीब है ।इसके आधी से ज़्यादा गरीबी की  रेखा से नीचे। सरकार द्वारा इन्हे मिलने वाली सहायता राशि को अफ़सरशाहों का ख़ुद हजम करना और इन्ही गरीबों से रिश्वत लेना निंदनीय तो है ही घोर अपराध भी है ॥जिसकी कोई माफी ज़मीर भी नहीं देता ।
शुरुआत छोटी है पर एक दिन अगर हमे अपने सपनों का भारत देखना है । और इस भ्रष्टाचार के तमस से निकलना है तो ये कोशिश करनी ही होगी । तभी इस रात की  सुबह होगी ….

99999999

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (4 votes, average: 4.75 out of 5)
Loading ... Loading ...

31 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

prateekraj के द्वारा
March 27, 2012

मनु जी, सही सुझाया है आपने.जब तक लोग जागरूक नहीं होंगे तब तक सुधर नहीं होने वाला है.बदलाव हमें ही लाना होगा पर अगर सभी इसमें साथ नहीं होंगे तो फिर ये करना मुश्किल होगा क्योंकि जब एक इंसान रिश्वत को इनकार करेगा और दूसरा उसकी जगह हाँ कहेगा तो फिर इस पर रोक लगाना संभव नहीं होगा.इसके लिए सभी को शिक्षा को सही मायनो में अपनाना होगा. धन्यवाद.

prateekraj के द्वारा
March 27, 2012

मनु जी, सही सुझाया है आपने.जब तक log जागरूक नहीं होंगे तब तक सुधर नहीं होने वाला है.बदलाव हमें ही लाना होगा पर अगर सभी इसमें साथ नहीं होंगे तो फिर ये करना मुश्किल होगा क्योंकि जब एक इंसान रिश्वत को इनकार करेगा और दूसरा उसकी जगह हाँ कहेगा तो फिर इस पर रोक लगाना संभव नहीं होगा.इसके लिए सभी को शिक्षा को सही मायनो में अपनाना होगा. धन्यवाद.

    मनु (tosi) के द्वारा
    March 29, 2012

    जी बिलकुल ….. आभारी हूँ धन्यवाद

Sumit के द्वारा
March 22, 2012

सुंदर आलेख ………साथ में आपने घरो में होने वाली छोटी मोटी घुश्खोरी का सुंदर चित्रण किया है ………….अक्सर हम इतनी छोटी बातो को नज़र अंदाज़ कर देते है…मगर यही बातें बहुत असर करती है http://sumitnaithani23.jagranjunction.com/2012/03/16/घोड़े-और-क्रिकेट-का-मेल/

    मनु (tosi) के द्वारा
    March 23, 2012

    सुमित जी आपका बहुत-बहुत धन्यवाद

mparveen के द्वारा
March 22, 2012

पूनम जी जिस दिन हम जाग जायेंगे उसी दिन सुबह हो जाएगी इस रात की . अभी अंगड़ाई ले रहे हैं जल्दी ही जागेंगे ऐसी उम्मीद है … बहुत सुंदर बधाई हो !!

    मनु (tosi) के द्वारा
    March 23, 2012

    धन्यवाद परवीन जी …

sonam के द्वारा
March 22, 2012

Good Morning poonam ji You are right poonam ji. We always talk about corruption but never think. भ्रचार तो हमारे अन्दर है, और हमें ही इसे खत्म करना होगा। उत्तम व विचारणीय आलेख के लिए बधाई। सादर

    मनु (tosi) के द्वारा
    March 23, 2012

    धन्यवाद सोनम जी ………

Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
March 22, 2012

आप तो अच्छा लिखती ही hain , is bar bhi आप ne ek sulagti samasya ko अपने आलेख का विषय banaya hai | badhai !!

    मनु (tosi) के द्वारा
    March 23, 2012

    धन्यवाद विजय जी ! जब आप लोगो की प्रतिक्रिया अपनी पोस्ट पर देखती हूँ तो सचमुच लगता है कि कुछ लिखा है मैंने …. वरना सब बेकार … आभारी हूँ आपकी

alkargupta1 के द्वारा
March 21, 2012

पूनम जी , हर अँधेरी रात के बाद एक नयी सुबह आती है और इस भ्रष्टाचार की अँधेरी रात के बाद कब सुबह होगी नहीं कहा जा सकता क्योंकि जो भी इस भ्रष्टाचार से मुक्त होना चाहता है वह अपनी समस्या का समाधान न होते देख स्वयं भी उसमें लिप्त हो जाता है…..इनकी जड़ों को बढ़ने से स्वयं को ही रोना होगा तभी कुछ सीमा तक एक नयी सुबह की आशा की जा सकती है……..अति गंभीर समस्या पर बहुत अच्छालिखा है उत्तम व विचारणीय आलेख………

    मनु (tosi) के द्वारा
    March 23, 2012

    नमस्कार मेम (अल्का जी ), आपकी प्रतिक्रिया नए जोश का संचार करती है … आभारी हूँ आपकी धन्यवाद

vishleshak के द्वारा
March 21, 2012

निश्चित  ही इस रात की सुबह होगी,लेकिन अभी काफ़ी संघर्ष करना होगा और सतत करना होगा और पूरी ईमानदारी से करनी होगी ।जैसा आपने कहा कि हम जाने अन्जाने इस बुराई को स्वयं ही खाद पानी देते रहते है ।अतः जब तक इसे बन्द नहीं किया जाएगा ,तब तक सुबह नहीं हो सकती ।विश्लेषक&याहू .इन ।

    मनु (tosi) के द्वारा
    March 23, 2012

    धन्यवाद विश्लेषक जी …. आपकी प्रतिक्रिया हेतु हृदय से आभारी हु

minujha के द्वारा
March 21, 2012

पूनम जी नमस्कार बहुत अच्छी बात कही है आपने, भ्रष्टाचार को रोकना है तो जहां से इसकी शुरूआत होती है ,वही रोक कर इसकी वृद्धि ना होने दी जाय,अच्छे सुझाव युक्त आलेख के लिए बधाई

    मनु (tosi) के द्वारा
    March 23, 2012

    धन्यवाद मीनू जी ……..

vikramjitsingh के द्वारा
March 21, 2012

पूनम जी, सादर, अरे, आप, राजनीति में कहाँ उलझ गईं, जब तक संसद में दुष्टों और पापियों का आना जाना लगा रहेगा, इस रात की सुबह नहीं आएगी, हाँ कोशिश करने में कोई हर्ज़ नहीं, क्या पता……. क्योंकि, उम्मीद से ही दुनिया कायम है….. यही कहूँगा, आपकी पुरानी लीक से हटकर एक नई और अच्छी रचना………

    मनु (tosi) के द्वारा
    March 23, 2012

    धन्यवाद विकरमजीत जी !आशा नहीं छोड़ेंगे

yogi sarswat के द्वारा
March 21, 2012

तोशी जी नमस्कार ! आपने बेहतरीन लेख लिखा है ! सुबह तो होगी , लेकिन मुश्किल ये है की इस जंग में हम जिस पर भरोसा कर के चलते हैं वाही दागदार दिखाई देने लगता है और भरोसा टूटने लगता है ! लेकिन फिर भी आशा की किरण बाकी है और आप देखेंगे की एक दिन सूरज वाही होगा , उसकी रोशनी वाही होगी किन्तु उस सुबह का नज़ारा भारत में अलग तरह का होगा ! बहुत बढ़िया लेख और जागरूक भी !

    मनु (tosi) के द्वारा
    March 23, 2012

    आदरणीय योसी जी , नमस्कार ! आप बिल्कुल ठीक कह रहे हैं आपके आलेख भी मुझे खूब भाते हैं आपके लेख जागरूक करते हैं । धन्यवाद

dineshaastik के द्वारा
March 21, 2012

पूनम जी नमस्कार प्रथम तो हमें आशा वादी बनना होगा। असंभव कुछ नहीं है, हमें अपनी सोच बदलना होगी। कुछ लोग तो अपने भगवानों को भी रिश्वत देने से नहीं चूकते। हमारे देश में देश प्रेम की भावना की कमी है। यही कारण है कि भ्रष्टाचार का साम्राज्य फल फूल रहा है। इस तरह के आलेख या कवितायें लिख कर जागृति लाती रहिये। एक दिन निश्चित परिवर्तन होगा।  http://dineshaastik.jagranjunction.com/author/dineshaastik/

    मनु (tosi) के द्वारा
    March 23, 2012

    जी बिल्कुल दिनेश जी …. धन्यवाद

mataprasad के द्वारा
March 21, 2012

आदरणीया मनु (tosi) जी , आशा तो यही है की एक दिन मेरा देश भ्रष्टाचार से मुक्त होगा और जिसदिन भ्रष्टाचार से देश मुक्त हुआ फिर सोने की चिड़िया होते देर नही लगेगा । काबिले तारीफ लेख http://kingmp.jagranjunction.com/2012/03/14/तेरी-चाहत-में-मै-दीवाना-हु/

    मनु (tosi) के द्वारा
    March 23, 2012

    धन्यवाद माता प्रसाद जी ……. आशा है एक दिन ऐसा आएगा ॥जब चाहे हम हो न हों

March 20, 2012

जिन गरीब लोगों के पास धन नहीं है रिश्वत देने के लिए उन भ्रष्ट लोंगों (अफसरों )को ,जो सरकार द्वारा भेजी गई व्रद्धावस्था पेंशन देंगे , वो आसानी से पेंशन नहीं पा पाते। वो बेचारे गरीब वृद्ध अपनी पेंशन पाये बिना दफ़्तरों के चक्कर काट-काट कर भूख से मर जाते हैं…विचारणीय बिंदु उठाया है आपने…..हार्दिक आभार!

    मनु (tosi) के द्वारा
    March 23, 2012

    धन्यवाद अनिल जी ……….

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
March 20, 2012

स्नेही मनु ये न भूलें की हम भारतीय हैं हर क्षेत्र मैं आगे, तो भ्रष्टाचार में क्यूँ नहीं. सुन्दर लेख. विजयी होगी. बधाई.

    मनु (tosi) के द्वारा
    March 23, 2012

    जी बिल्कुल सर जी … आपका आशीर्वाद मिल गया बस वो ही बहुत है इस मनु के लिए … धन्यवाद

akraktale के द्वारा
March 20, 2012

पूनम जी सादर नमस्कार, आपने भ्रष्टाचार पर चिंता व्यक्त करने के साथ ही घर पर अनजाने होने वाले भ्रष्टाचार पर भी रोष व्यक्त किया है.कई सुझाव भी आपने दिए हैं.किन्तु आपको लगता है की हमारे व्यक्तिगत स्वार्थ को भूले बिना ये उपाय कारगर साबित होंगे.मुझे तो नहीं लगता. जब तक हम अपने स्वार्थ की बलि नहीं देंगे कामयाबी हमसे हमेशा दूर ही रहेगी. आपने सच ही कहा है की देश के हर सरकारी महकमे में आज भ्रष्टाचार फलफूल रहा है.नीचे से ऊपर तक ओर सिर्फ यहीं नहीं न्याय के मंदिर में भी सरे आम भ्रष्टाचार देखने को मिलता है.कार्य बहुत बहुत बहुत मुश्किल है किन्तु प्रयास छोड़ देना भी आत्महत्या से कम नहीं है.

    मनु (tosi) के द्वारा
    March 23, 2012

    नमस्कार अशोक जी , आपकी बात से सहमत हूँ …पर सपना जो देखा है उस ओर एक प्रयास …. धन्यवाद हृदय से आभारी हूँ


topic of the week



अन्य ब्लॉग

latest from jagran