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मृत्यु की कामना

Posted On: 15 Mar, 2012 Others में

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कई बार ऐसा होता है जब अपना कोई , बिलकुल अपना किसी बहुत ज़्यादा कष्ट से गुजरे और लगातार गुजरे तब बेबस मनुष्य केवल ईश्वर से  ही प्रार्थना करता है। सबकी प्रार्थनाएँ अलग-अलग होती हैं । ऐसा ही मेरे साथ हुआ , जब मैंने अपनी माँ  का कष्ट देखा तो ,मेरे मुँह से भी एक प्रार्थना उनके लिए  निकली । और वो ईश्वर ने सुन ली।पर उस प्रार्थना के पूरा होने पर जो अफसोस मुझे हुआ , वो पल-पल मेरी आँखें गीली किए रहता है । उसी पश्चाताप में निकली ये रचना आप सबके सामने  …………… और माँ से माफी की उम्मीद में …….

मृत्यु की कामना
———————————
तेरी पथराई सी आँखें
जब सूख गयी थी
दो रोटी के निवाले की मर
जब तेरी  भूख गई थी
तू बैठी रही कई महीने  ऐसे
जैसे कोई ले ली हो समाधि
जीने की चाह तेरी खत्म हो गई
सारी इच्छायें जैसे नदी मे बहा दी
तेरे हाथ – पैरों की वो ठिठरन
जब मैं महसूस करती थी
जहां-तहां से तुझे  ढकने को
क्या-क्या प्रयास करती थी
सो बार पुकारो जब माँ माँ
तब एक हल्की हुंकार तू भरती थी
तुझे पल-पल मरते देख के माँ
मैं भी पल=पल ही मरती थी
तेरी मृत्यु की कामना
मैंने तब की थी माँ…..

एक-एक सांस लेने में कष्ट
जब तुझको हुआ करता था
तेरे उस दर्द से माँ
मेरा दिल बहुत डरता  था
कई महीनो की मौत
जब तू रुक के झेल रही थी
उसी मौत को मैंने देखा
जो तुझसे खेल रही थी
तेरी मृत्यु की कामना
मैंने तब की थी माँ……….

मेरी सुनली ईश्वर ने
और तू चली गई
तूने मुझे जन्म  दिया था
तूने मुझे सब दिया था
बस एक बार आखिरी चीज़
तू मुझको माफ कर दे माँ
मैंने तेरी मृत्यु की कामना
की थी माँ  …………………….. पूनम राणा ‘मनु’

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40 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Sumit के द्वारा
March 23, 2012

अक्सर जब हम आपने किसी को( जिसे हम बहुत प्यार करते है ) तो उसकी कष्टों से मुक्ति के लिए …मौत की कामना कर लेते है………मगर उस वक़्त भी हम उसके बारे में ही सोच के कहते है , ताकि वो इन कष्टों से आजाद हो जाये ….सार्थक रचना ………. http://sumitnaithani23.jagranjunction.com/2012/03/15/आत्महत्या/

March 21, 2012

आज पहली बार यह रचना पढ़ी. जीवन वाकई कभी-कभी इतना क्रूर हो जाया करता है, की सही और गलत का भेद समझ पाना नामुमकिन हो जाता है. खुद को दोष मत दीजिये. वक़्त का कसूर था. इस वक़्त जो करने का है, वह है की अपनी माताजी के लिए शुभकामनाएं कीजिये, की वे जहां भी हो, कष्टमुक्त हों. (हमारी संस्कृति मृत्यु को अंत नहीं, एक परिवर्तन-भर मानती है. इसलिए आज भी उनका अस्तित्व तो है ही..) शुभकामनाएं.

    मनु (tosi) के द्वारा
    March 23, 2012

    जी टिमसी जी ……… सादर

March 17, 2012

बेहद मार्मिक कविता… झकझोरती है। झुरझुरी सी।

    मनु (tosi) के द्वारा
    March 17, 2012

    साभार …… अकबर जी

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    March 21, 2012

    पूनम जी , मृत्यु तो अटल है — पर अपनों के मरने का दर्द –मैं क्या ? सारी दुनिया जानती है !! आपके मन मलाल कोई भी समझ सकता है ! इस कविता में आप सफल हैं | आप की माँ आप को ज़रूर माफ कर देंगी , वैसे उस अवस्था में हर इन्शान वही करता जो आप ने किया || कोटिशः बधाई !!

sonam के द्वारा
March 16, 2012

मैं इस काबिल तो नही कि आपके दर्द को कम कर सकूं लेकिन एक बात कहना चाहूंगी कि बेशक आपने अपनी मां की मौत की कामना की होगी लेकिन यह जरुरी तो नही कि भगवान ने आपकी ही दुआ कुबूल करके आपकी मां को म्रत्यु प्रदान की होगी। क्या उसने आपकी सभी कामनाएं पूरी की है। एक बार सोचियेगा जरुर। मौत और जिन्दगी तो उसके हाथ में है।

    मनु (tosi) के द्वारा
    March 16, 2012

    सोनम बहन मेरी प्यारी सी छोटी सी ॥ अपनी बातों से मेरा दुख कम करने की कोशिश की तुमने ……… ईश्वर आपको सदा खुश रखे

Aakash Tiwaari के द्वारा
March 16, 2012

पूनम जी, जिंदगी में माँ की क्या एहमियत होती है ये लगभग सभी इंसान समझते है(माँ का अपमान करने वाले इंसान की श्रेणी में नही बल्कि जानवर की श्रेणी में आते है.)मै अपनी माँ को कितना प्यार करता हूँ ये मै खुद नही जानता..और मुझे इस बात का भी आभास है की जब तक मेरी माँ है तभी तक मेरी साँसे चल रही है..आपने उप्पर काव्यात्मक रूप में जो अपनी कहानी बताई है वो बिलकुल हकीकत है..आपकी जगह मै होता तो मै भी यही करता लेकिन फर्क इतना है इसके बाद मेरा जीना मुश्किल होता..आज अगर मै जिन्दा हूँ तो सिर्फ और सिर्फ अपनी माँ की बदौलत.. मेरी नजर में ऐसा कोई शब्दों का जोड़ा नहीं नही बनता की माँ के प्यार का बखान कर सकू.या फिर माँ से दूरी का दर्द समझा सकूँ.. बस मै एक लड़का होते हुए भी अपनी माँ के साथ 24 घंटे रहना चाहता हूँ..इसी वजह से एक बार मैंने दिल्ली में अपनी बहुत अच्छी नौकरी के मौके को गँवा दिया था.. बहुत ज्यादा लिख चूका हूँ..आपके दर्द को समझ गया..बस यही कहूँगा.. आकाश तिवारी

    मनु (tosi) के द्वारा
    March 16, 2012

    आकाश जी, मेरी माँ भी मेरे लिए मेरा भगवान थी … मात्र 8-9 साल की उम्र में जब मैंने अपने पिताजी को खोया था … तब से अब तक माँ ने हम सबको पाला -पोसा क्या-क्या नहीं किया था । वो चुप रातों को रोती तो मै उसे 8-9 साल की उम्र में उसे अपने गले से लगा लेती थी। 10 साल की होते-होते मैं इतनी समझदार हो गई की अपनी माँ का अपनी बेटी की तरह खयाल रखने लगी थी।जब से अब तक वो मेरी पहली ज़िम्मेदारी रही । मेरे अपने बच्चे भी उनके बाद थे । इन सबमे मेरे पति ने मेरा पूरा सहयोग दिया । डेढ़ साल हो गया वो ईश्वर के पास चली गईं । अकेलापन रह गया एक मजबूत रिश्ता था मेरा मेरी माँ के साथ … जैसा आपका है

akraktale के द्वारा
March 15, 2012

पूनम जी सादर नमस्कार, बहुत मार्मिक कविता.जिस बात के लिए माँ ने आशीर्वाद दिया होगा उसके लिए क्षमा मांगना. ये क्या बात हुई. मृत्यु सत्य है. आपने माँ के लिए जो कामना की वह मृत्यु की नहीं वरन मुक्ति की कामना थी. जब घर खंडहर में तब्दील हो जाए तो फिर नए घर में प्रविष्टि के लिए उस घर को भारी मन से ही सही मगर छोड़ना पड़ता ही है.

    मनु (tosi) के द्वारा
    March 16, 2012

    जी अशोक जी !आप सबसे अपना दुख बांटा मैंने ……. और आप सबने मेरा दुख कम करने की कोशिश की एक सच्चे हितेषी की तरह ……. आप की व सब की दिल से आभारी हूँ

March 15, 2012

सादर नमस्कार! मार्मिक भाव और अभिव्यक्ति, माँ की आँचल तलाशती हुई रचना…..हार्दिक आभार.

    मनु (tosi) के द्वारा
    March 16, 2012

    अनिल जी दर्द है ये इसे जीतने भी शब्द दिये जाये कम पड़ जाते हैं पर दर्द जब भी थोड़ा ही निकल पाता है ,,,,न जाने क्यूँ

minujha के द्वारा
March 15, 2012

पूनम जी आपने तो भावुक कर दिया,पर मेरी माने अपराधबोध से ग्रसित ना हो,आपकी जगह कोई भी होता तो यही कहता ईश्वर से,बहुत मार्मिक चित्रण

    मनु (tosi) के द्वारा
    March 16, 2012

    मीनू जी …… कोशिश करती हु पर अपराधबोध है कि पीछा नहीं छोडता

dineshaastik के द्वारा
March 15, 2012

दर्द की इंतिहां आँखें नम कर गईं। कितना कठिन होता यह कहना, कि मेरी माँ मर गई। माँ कभी नहीं मरती, हमारे दिल में रहती हैं, कह सकते हैं मेरी माँ, ईश्वर के घर गई।

    jlsingh के द्वारा
    March 16, 2012

    सहमत! और ज्यादा क्या कहूं! अपनों के जाने का गम ऐसा ही होता है, पर कष्ट से छुटकारा मिल जाय यह भी कोई अपना ही चाहता है. बहुत ही कारुणिक दृश्य का चित्र आपने खींच दिया! ईश्वर आपकी माँ के आत्मा को शांति प्रदान करें!

    मनु (tosi) के द्वारा
    March 16, 2012

    दिनेश जी …….. तसल्ली देने के लिए आपकी आभारी हु

shashibhushan1959 के द्वारा
March 15, 2012

आदरणीय पूनम जी, सादर ! आपने ऐसा कुछ नहीं किया कि आपको पश्चाताप की सोचना पड़े ! बहुत मार्मिक भाव ! उतना ही मार्मिक वर्णन ! बहुत सुन्दर ! बहुत प्रभावी !

    मनु (tosi) के द्वारा
    March 16, 2012

    आदरणीय शशि भूषण जी, मैं कोशिश करूंगी अपने दिल को समझाने की । एक शेर है मेरी ही एक गज़ल का ज़ख्म गहरे है, और भरने में नाक़ाबिल फिर भी उन जख्मों को सिये जा रही हूँ ॥ आभारी हूँ आपकी मेरा दर्द आपने समझा …

ANAND PRAVIN के द्वारा
March 15, 2012

पूनम जी, नमस्कार जीवन तब तक ही अच्छा लगता है…………जब तक एक व्यक्ति उसे जिन्दादिली से जी सकें …………. आपकी ये काफी कर्णप्रिय रचना………………….बहोत ज्यादा नहीं कह सकता क्यूंकि अपनों को खोना एक दुखद अहसास होता है…………….फिर माँ-बाप से ज्यादा प्रिय व्यक्ति के जीवन में और क्या हो सकता है……….. कविता के बारे में कहना चाहूंगा…………में ज्यादा बारीकियों के बारे में तो नहीं जानता किन्तु एक सुन्दर रचना को आप और सुन्दर बना सकती थी क्यूंकि ये आपके दिल की आवाज़ है……………इसका ये मतलब बिलकुल नहीं की मैं आपकी रचना को कमतर कह रहा हूँ………….बस और की उम्मीद थी आपसे………एक बार सोचियेगा…………………. आपने जब “ऐ पथिक” लिखा था तो मैंने कहा था की मैं “ओ राही” लिख रहा हूँ ……….बस उसे कुछ दिनों पहले ही पोस्ट किया है……………..एक बार पढियेगा……………धन्यवाद

    मनु (tosi) के द्वारा
    March 16, 2012

    आनंद जी , कई बार हम रचना गढ़ते हैं तो हर बार ये कोशिश होती है की इस बार और भी अच्छी हो ,पर हर बार सबको अच्छी ही लगे ऐसा नहीं होता …….. ये एक रचना की बात थी …. पर जब अपने दर्द की बात हो वो भी माँ से संबन्धित तब बहुत मुश्किल है …दर्द उकेरना मेरे साथ ऐसा ही हुआ है ,जब भी इस रचना में कुछ करने की कोशिश करती हु माइग्रेन के दर्द से मेरा सर फटने लगता है … ये रचना ही नहीं पढ़ी जाती मुझसे …… इसमे मुझ से कुछ न होगा …… बाकी आपकी प्रतिक्रिया अनमोल है मेरे लिए । सादर

Tamanna के द्वारा
March 15, 2012

तोसी जी… आपकी कविता मैं पूरी पढ़ नहीं पा रही हूं….. बीच में ही आंखें नम होने लगी हैं….. कृप्या कर मुझे क्षमा करें…!!! http://tamanna.jagranjunction.com/2012/03/14/congress-vs-samajwadi-party/

    मनु (tosi) के द्वारा
    March 16, 2012

    कोई बात नहीं तमन्ना जी … आप ने अपनी प्रतिक्रिया दी वही काफी है … साभार

chandanrai के द्वारा
March 15, 2012

Dear Manu ji, What a beautiful potrait of pain & poetry . In life there will be always such moment where we all felt defeated, when willingly, or unwillingly we have to take decession which are not liked by us, yet we have to do such cruel prayers. http://chandanrai.jagranjunction.com

    मनु (tosi) के द्वारा
    March 16, 2012

    आपकी प्रतिक्रिया के लिए आभारी हूँ चन्दन जी ………

Jayprakash Mishra के द्वारा
March 15, 2012

मनु जी क्या कहूं ……कहते नहीं बनता

    मनु (tosi) के द्वारा
    March 16, 2012

    जय प्रकाशजी … मैं समझती हु ……. आभार व्यक्त करी हु

Bhupesh Kumar Rai के द्वारा
March 15, 2012

पूनम जी! रचना ने भावुक कर दिया.

    मनु (tosi) के द्वारा
    March 16, 2012

    जी भूपेश जी आभारी हूँ की आप मेरे भाव समझ सके

kanafoosi के द्वारा
March 15, 2012

दर्द की इन्तहा ……………..मौत की कामना ……………! इससे ज्यादा कुछ नहीं लिख सकता …………………!

    nishamittal के द्वारा
    March 15, 2012

    बहुत मार्मिक परन्तु सच के करीब रचना .कमेन्ट नहीं जा रहा है अतः रिप्लाई से कर रही हूँ

    मनु (tosi) के द्वारा
    March 16, 2012

    साभार ……..भारद्वाज जी

vikramjitsingh के द्वारा
March 15, 2012

पूनम जी सादर, आपने तो, हमको हमारी माँ की याद दिला दी, वो भी तो बस, अब हमारे दिल में ही जिंदा हैं,… और, बिल्कुल सच कहा आपने, जब इंसान का हालात पर कोई बस नहीं रहता, तो हर कोई यही कामना करता है……. धन्यवाद पूनम जी…….

    मनु (tosi) के द्वारा
    March 16, 2012

    आपकी प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद विक्रम जीत जी ……

मनु (tosi) के द्वारा
March 16, 2012

काश मैं अपने दर्द पर काबू पा पाती मेम (निशाजी ) अगर ये केवल एक रचना होती तो जरूर इससे बेहतर होती ……….. पर कलाम नहीं चलती

मनु (tosi) के द्वारा
March 16, 2012

काश ये केवल एक रचना होती मेम (निशाजी) तो और बेहतर होती ………….. पर इस पर कलम नहीं चलती ……… मेरा दर्द महसूस हुआ आपको आपकी आभारी हूँ

मनु (tosi) के द्वारा
March 16, 2012

आदरणीय जवाहर भाई जी , मैं कई ग्रुप से जुड़ी हूँ … पर जितना स्नेह व अपनापन इस मंच पर मुझे मिलता है । वो कहीं नहीं मिलता । मैं अपनी फिलिंग्स कम ही शेयर करती हूँ । यहाँ भी डर रही थी । पर यहाँ मेरा दुख बांटने की कोशिश की …आपकी व सबकी दिल से आभारी हूँ ….

मनु (tosi) के द्वारा
March 23, 2012

आभार व्यक्त करती हूँ विजय जी ….


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