मेरे विचार आपके सामने

नया सफर नई दिशा

32 Posts

833 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 9515 postid : 39

मेरा एक विचार आपके सामने (जरूरी जानकारी )

  • SocialTwist Tell-a-Friend

मेरा एक विचार आपके सामने
—————————————
आज के इस शिक्षा के युग में जब भी हम शिक्षा के क्षेत्र की ओर अपनी निगाह घुमाते हें तो ,एक गर्व का अनुभव होता है ।पूरे विश्व में भारत की पढ़ाई का डंका बज रहा है , हमारे महत्वपूर्ण संस्थानो जैसे आईआईटी या वैसे ही प्रतिष्ठित संस्थानों के छात्र पूरे  विश्व में अच्छे पेकेज पर बुलाये जाते हैं या विदेशों में अच्छे पदों पर नियुक्त हैं । हमारे छात्र जहां ओलंपियाड जैसी प्रतियोगिता में अव्वल आते हैं वहीं स्पेस सेंटर जैसी जगह पर जाने के लिए मुश्किल प्रक्रिया से गुज़र कर जाने के लिए अपनी प्रतिभा के बल पर सक्षम हैं इसका उदाहरण कल्पना चावला , सुनीता विलियम जैसे नाम हैं । इतनी तरक्की होने के बावजूद एक बात मुझे हमेशा खटकती है , वो है बच्चो को जो जानकारी समयानुसर महत्वपूर्ण होती है वह नहीं मिलती । मैंने कई स्कूलों के प्रधानाचार्यों से इस बाबत बात की थी ,थोड़ा सा परिवर्तन तो हुआ ,परंतु समय बदलते ही नतीजा वही ‘ढ़ाक के तीन पात ‘।
बात कुछ ज़्यादा बड़ी नहीं बस इतनी सी है कि मैं चाहती हूँ जब हम दूसरे विकसित देशों कि देखा -देखी हर स्तर पर अपनी स्थिति सुधारने कि कोशिश में हैं तो शिक्षा के क्षेत्र में भी बच्चों को कुछ ज़रूरी जानकारियाँ अवश्य होनी चाहिए जैसे :-
1-सड़क पर जाते समय किसी भी व्यक्ति या बच्चे के साथ एक्सीडेंट जैसी दुर्घटना होने पर सबसे पहले किन्हे फोन करें बच्चों को इसकी जानकारी हर स्कूलो में दी जानी चाहिए,साथ में डॉक्टर या अस्पताल या एंबुलेंस का फोन नंबर भी दें ।
2-कोई झगड़ा -फसाद या चोरी जैसी दुर्घटना होने पर , बच्चा किसे या किन को फोन करे ,उनका नाम व नंबर उनकी डायरी में लिखा होना चाहिए ।
3-कोई आग जैसी दुर्घटना होने पर किन को बच्चा फोन करे उसकी जानकारी उन्हे होनी चाहिए ।उनका नंबर ,नाम बच्चो कि डायरी मे लिखा होना चाहिए ।
4- अपने जिले के वर्तमान कमिश्नर का नाम व नंबर डायरी में लिखा होना चाहिए ।
5- अपने जिले के वर्तमान डिस्ट्रिक्ट मेजिस्ट्रेट का नाम व नंबर हो ।
6- अपने पास के थाने के अधिकारी या थाने का फोन नंबर नोट हो ।
7- प्रधानाचार्य का निजी फोन नंबर आपातकालीन स्थिति के लिए बच्चो के पास होना जरूरी है ।
8- कोई भी अजीब सी ,दुर्लभ वस्तु दिख जाने पर पुरातत्व विभाग का फोन नंबर नोट हो ।
9-किसी भी दुर्लभ जानवर के फंस जाने पर ,उनकी दुर्घटना होने कि दशा में वन विभाग का फोन नंबर हो।
10 -हर बच्चे के पास उनकी क्लास टीचर का फोन नंबर अवश्य होना चाहिए ।
11- गंदा पानी या गंदगी के कारण होने वाली बीमारियों के लिए जिम्मेदार किसी भी शिकायत के लिए बच्चो को जागरूक करके उन दफ्तरों का नंबर भी देना चाहिए ।
किसी का ट्रांसफर या नंबर बदलने कि दशा में बच्चो को नया नंबर तुरंत दिया जाना चाहिए ।
रोज एक महापुरुष का विचार (थौट ) ब्लेक बोर्ड पर लिखा होना चाहिए ।इस विचार की महत्ता बताते हुये कक्षा की शुरुआत करनी चाहिए। रोज़ एक विचार लिखने की ज़िम्मेदारी रोज़ एक विध्यार्थी को सोंपनी चाहिए ।ताकि भविष्य में किनही कठिन परिस्थितियों में अपने आपको पाकर कोई विद्यार्थी किसी विचार से प्रेरणा ले सके ।
इन सब फोन नंबरों से ऑफिस या ओफिसरो के नाम से व उससे संबन्धित विभाग से जहां बच्चे इस जानकारी से अपडेट रहेंगे वहीं उनके परिवारजन भी उपरोक्त किसी भी स्थिति की दशा में वो संबन्धित विभाग में समय पर सूचना देकर किसी भी बड़ी दुर्घटना से खुद को व ओर लोंगों को भी बचा सकेंगे।
सिविक्स , हिस्ट्री इत्यादि में बच्चों को मुख्यमंत्री ,राज्यसभा ,लोकसभा, पंचायत इत्यादि तो पढ़ा दी जाती है ।जी के में वर्तमान प्रधानमंत्री , राष्ट्रपति भी पूछ लिए जाते हैं । पर जिनकी आव्यश्क्ता कदम-कदम पर हमें पड़ती है उसपर कोई भी ध्यान नहीं देता , जबकि विदेशों में सबसे पहले बच्चों को यही शिक्षा दी जाती है ॥ …….. पूनम राणा ‘मनु’

| NEXT

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (3 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

18 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

akraktale के द्वारा
February 28, 2012

पूनम जी नमस्कार, आपकी बात बिलकुल सही है बच्चों को आवश्यक फोन नम्बरों की जानकारी अवश्य ही होनी चाहिए.आपने कुछ आवश्यकता से अधिक नम्बरों की जानकारी रखने की सलाह दी है ये ठीक वैसा ही है जैसे बच्चे के बस्ते का बढ़ता बोझ. सुविचार तो पाठशालाओं में लिखे ही जाते हैं जरूरत है प्रार्थना के समय इन्हें पढ़कर समझाने की. विचारणीय बिंदु. धन्यवाद.

    tosi के द्वारा
    February 28, 2012

    अशोक जी , नमस्कार ! आपने बिलकुल ठीक कहा पर सारे फोन नंबर बच्चों को याद करने की बजाय उनकी डायरी में नोट हों । हर स्कूल में सुविचार नहीं लिखे जाते जहां नहीं लिखे जाते वहाँ भी लिखे जाने चाहिए … आपकी प्रतिक्रिया मेरे लिए अमूलय है धन्यवाद ….

ANAND PRAVIN के द्वारा
February 27, 2012

पूनम जी, नमस्कार बहुत ही उचित सोच आपकी किन्तु मैं इसपर कुछ कहना चाहूँगा आपकी बातें तर्कसंगत है किन्तु वास्तविकता से पड़े है सबसे pahle तो ये hamaaraa देश है और इसमें हम भारतीय रहतें है और हमारी सबसे बड़ी समस्या यह है की हम कोम्प्रिसन बहुत करतें है जो की कहीं से तर्क सांगत नहीं है अपनी उपयोगिता होनी चाहिए किन्तु वो किसी की देखादेखी नहीं इसलिए आपकी अंतिम पांति को मैं योग्य शैली का दर्जा नहीं दूंगा “रहीमदास” का एक दोहा है “कौन बड़ाई जलधि मिली गंग नाम सौ धिम, काहू की प्रभुता नहीं घटी पर घाट गए रहीम” इसका तो वैसे विस्तृत अर्थ होता है किन्तु मूल ये है की किसी को किसी के जैसे बन्ने की कोशिश नहीं करना चाहिए वरना उसकी अपनी अस्तित्व नहीं रह जाता अब सवाल ये है की आपके इन आदर्श वादी बातों का क्या तो आप की बातों में दम तो है कितु ये बस कहने से ज्यादा नहीं है नातिक पटल पर भले ही ये मूल्यवान हो किन्तु प्रक्टिकल नहीं है खैर ज्यादा तर्क नहीं देना चाहूँगा कुछ बुरा लागा हो तो माफ़ी

    February 27, 2012

    मित्र, प्रैक्टिकल का मतलब यह नहीं है कि जो दिल को अच्छा लगे वो हम करते जाएँ…..यह तो खुद गरजी कहलाएगी. प्रैक्टिकल का मतलब है कि जो थिउरी आपके सामने है, उसमें कितना सफल हुए है…यदि मेरी बात बुरी लगी हो तो बोलना फिर बोलूँगा… टोशी जी, सादर नमस्कार! आप इसके बातों पर प्रति क्रिया देने के लिए स्वतंत्र है. परन्तु हम दोनों के बीच में मत कुदियेगा. यह हम दोनों की आपस की बात है……….वैसे इस बेशकीमती सुझाव के लिए आपका हार्दिक आभार.

    ANAND PRAVIN के द्वारा
    February 27, 2012

    मित्र इस दोहे का अर्थ समझ लो बाकी कुछ नहीं बोलूंगा नो विवाद फॉर थिस मैटर

    tosi के द्वारा
    February 28, 2012

    नमस्कार आनंद जी ! बात तो आपने अपने हिसाब से सही ही कही है परंतु… एक बात है की ये भी हमारे महा पुरुष ही कहते हैं अच्छी शिक्षा जहां से भी मिले वहीं से ले लो … किसी की अच्छी बात सीखने से हमारे आस्तित्व पर कैसे कोई खतरा मंडरा सकता है जब हमारे लोग उच्च शिक्षा ग्रहण करने विदेश जाते हैं तो क्या वो भारतीय नहीं रह जाते ॥ अभी देख लो पैंट-कमीज़ पहनकर भी हम अपने भारतीय संस्कार निभा रहे हैं … सबकी अपनी सोच है … मुझे जो अपने बच्चों के लिए कमी महसूस हुई वही सबको होती होगी यही सोचकर मैंने ये लेख तैयार किया बाकी। मैं बुरा नहीं मानती सबकी सोच मेरे लिए महत्वपूर्ण है धन्यवाद

krishnashri के द्वारा
February 27, 2012

मनु जी आपने बहुत ही सही बातों को उठाया है ,मेरे विचार से इसका पालन अनिवार्य रूप से होना चाहिए

    tosi के द्वारा
    February 28, 2012

    धन्यवाद सर !

Aakash Tiwaari के द्वारा
February 27, 2012

मनु जी मै सरस्वती विद्या निकेतन का छात्र रहा हूँ..आपने जितनी भी बाते उप्पर लिखी है मेरी डायरी में उस वक्त लिखी होती थी और डायरी रोजाना स्कूल ले जाना जरूरी था.. मगर आजके वक्त में उस स्कूल में छात्र नहीं है क्यूंकि अंग्रेजी माध्यम का बोलबाला है.. आकाश तिवारी

    tosi के द्वारा
    February 28, 2012

    जी आप बिलकुल सही कह रहे हैं आकाश जी … मैंने कई स्कूलो की स्थिति देखकर ही ये लेख तैयार किया था … आपकी प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद

yogi sarswat के द्वारा
February 27, 2012

बढ़िया baatein , हमें भी सिखाई आपने ! धन्यवाद ! http://yogensaraswat.jagranjunction.com/2012/02/14

    tosi के द्वारा
    February 28, 2012

    धन्यवाद योगी जी

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
February 27, 2012

बहुत सुन्दर बात बताई, पालन जरूरी है . धन्यवाद

वाहिद काशीवासी के द्वारा
February 27, 2012

मनु जी, आपने उचित बिंदुओं पर प्रश्न उठाये हैं। इन पर अमल करना सुनिश्चित किया जाना चाहिए। आभार,

    tosi के द्वारा
    February 28, 2012

    धन्यवाद वाहिद जी !

chandanrai के द्वारा
February 27, 2012

बहुत ही उम्दा अभिव्यक्ति

    tosi के द्वारा
    February 29, 2012

    धन्यवाद चन्दन जी

tosi के द्वारा
February 28, 2012

ठीक है अनिल जी सबके अपने-अपने मत हैं…


topic of the week



अन्य ब्लॉग

latest from jagran