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आख़िरी पेड़

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आख़िरी पेड़
——————
मेरी उम्मीदों को टूटने की चोट से
जब प्रतिक्रिया स्वरूप
मेरी आत्मा का लहू
मेरी आँखों से लावा बन
बह निकलता था
जब तुम्हारी छांव में
शीतल हवा सी बांह से
सूखते -पोंछते मेरे आँसू
कब ठहर जाते थे पता नहीं॥

हर रिश्ते की महक
तुम्ही से बिखरी
मेरे आँगन में थे तुम
जैसे बरखा में छतरी
निशां मेरे बचपन के
आज तक तुम पर थे
यौवन की पहली अंगड़ाई भी
मेरी तुम्ही से उतरी॥

मेरे मरुस्थली जीवन के
ए! आख़िरी पेड़ बताओ

साखों ने साथ छोड़ा पहले
या पत्ते पहले जले थे
या उन साँपों ने डसा
जो तुम्हारी आस्तीन में पले थे
वो कौन था विश्वासघाती ॥

मेरे मरुस्थली जीवन के ए! आख़िरी पेड़
कैसे ढह गए तुम पता नहीं .. …………… पूनम राणा ‘मनु’


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36 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

dineshaastik के द्वारा
March 5, 2012

पूनम जी नमस्कार, सुन्दर भावों को अभिव्यक्त करती हुई रचना के लिये बधाई साथ साथ होली पर्व को हार्दिक शुभकामनायें….. कृपया इसे पढ़कर समालोचनात्मक प्रतिक्रिया आवश्य दें…. http://dineshaastik.jagranjunction.com/?p=60&preview=trueक्या ईश्वर है (कुछ सवाल)

    मनु (tosi) के द्वारा
    March 5, 2012

    नमस्कार दिनेश जी … आपको भी होली की हार्दिक शुभकमनाएँ …. सादर धन्यवाद

Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
March 2, 2012

सशक्त मनोभावों का गुम्फन- विम्बात्मक- आखरी पेड़ में , | बधाई स्वीकारें !

    मनु (tosi) के द्वारा
    March 3, 2012

    धन्यवाद आचार्य विजय जी ……. साभार

Sumit के द्वारा
March 2, 2012

बहुत ही सुंदर ,,,,,,,,,,भावनाओ से पूर्ण कविता http://sumitnaithani23.jagranjunction.com/2012/02/18/हिंदुस्तान-vs-इंडिया/

    मनु (tosi) के द्वारा
    March 3, 2012

    धन्यवाद सुमित जी

nishamittal के द्वारा
March 1, 2012

बहुत ही सुन्दर दिल को छू लेने वाली रचना पर बधाई

    tosi के द्वारा
    March 2, 2012

    धन्यवाद निशा जी !

akraktale के द्वारा
February 28, 2012

पूनम जी नमस्कार, लड़की का जीवन ही कुछ ऐसा है,बचपन की यादें और वहां की चिंता दूर रहने पर अक्सर मन को भारी कर देती हैं. आपने सुन्दर रचना से बयां किया है.बहुत खूब. हार्दिक बधाई. साखों ने साथ छोड़ा पहले या पत्ते पहले जले थे या उन साँपों ने डसा जो तुम्हारी आस्तीन में पले थे वो कौन था विश्वासघाती ॥ मेरे मरुस्थली जीवन के ए! आख़िरी पेड़ कैसे ढह गए तुम पता नहीं .. ……………

    tosi के द्वारा
    February 29, 2012

    धन्यवाद अशोक जी … अपने सच कहा कई यादें जीवन भर पीछा नहीं छोडती …. हम काव्य भावुक मन व्यक्ति अपनी हर चीज़ से जुड़ाव महसूस करते हैं … वही भावना शब्दो मे उतर आती है … आपने इसे दिल से पढ़ा सचमुच आभारी हु …

minujha के द्वारा
February 28, 2012

 खो देने की पीङा से सरोबार आपकी ये रचना बहुत कुछ कह जाती है,बधाई

    tosi के द्वारा
    February 29, 2012

    धन्यवाद मीनू जी ….

meenakshi के द्वारा
February 27, 2012

बड़े गहन भाव- भरी काव्य रचना की है आपने , अच्छे मिथकों का प्रयोग हुआ है ; मुबारक हो . मीनाक्षी श्रीवास्तव

    tosi के द्वारा
    February 28, 2012

    धन्यवाद मीनाक्षी जी!

jalaluddinkhan के द्वारा
February 27, 2012

एक मर्मस्पर्शी कविता,जो मन को छू गयी.बधाई.

    tosi के द्वारा
    February 28, 2012

    धन्यवाद खान साहब !

mparveen के द्वारा
February 27, 2012

मनु जी बहुत सुंदर भावों से युक्त आपकी रचना के लिए आपको बहुत साडी बधाई हो !!!

    mparveen के द्वारा
    February 27, 2012

    साडी नहीं सारी पढ़ें …

    tosi के द्वारा
    February 28, 2012

    धन्यवाद mparveenजी …

ANAND PRAVIN के द्वारा
February 27, 2012

पूनम जी, नमस्कार स्वर नहीं है “क्या कहूँ क्या ये कहूँ की ये जीवन की सच्चाई है या ये कहूँ ये आपकी प्रीत नहीं खुदा की खुदाई है पर जो भी हो आपने जो अपनी दिल की बात सुनाई है वो सुन कर मुझे भी कुछ कुछ याद अपनी आई है ” लाजबाब और निशब्द रहना आपकी लिखते रहिये

    tosi के द्वारा
    February 28, 2012

    धन्यवाद आनंद जी

Tamanna के द्वारा
February 27, 2012

बहुत खूबसूरत और भावनात्मक रचन..

    tosi के द्वारा
    February 28, 2012

    धन्यवाद तमन्ना जी

February 27, 2012

सादर नमस्कार! प्रकृति के प्रति कृतज्ञता और जागरूकता प्रकट करती हुई रचना…….अति प्रशंसनीय. बहुत-बहुत हार्दिक आभार,

    tosi के द्वारा
    February 28, 2012

    धन्यवाद अनिल जी

RAJEEV KUMAR JHA के द्वारा
February 27, 2012

सुन्दर कविता.बधाई! पूनम जी. मेरे मरुस्थली जीवन के ए! आख़िरी पेड़ बताओ साखों ने साथ छोड़ा पहले या पत्ते पहले जले थे सुन्दर पंक्तियाँ.

    tosi के द्वारा
    February 28, 2012

    धन्यवाद राजीव जी

Aakash Tiwaari के द्वारा
February 27, 2012

मनु जी, जो बात पिछले कई दिनों से मै कहना चाह रहा था..आज वाहिद जी ने कह दिया…गौर करियेगा. बहुत ही अच्छी और भावपूर्ण रचना.. आकाश तिवारी

    tosi के द्वारा
    February 28, 2012

    धन्यवाद आकाश जी … बिलकुल गौर करूंगी

वाहिद काशीवासी के द्वारा
February 27, 2012

भावनाओं से परिपूर्ण कविता के लिए बधाई मनु जी। एक आग्रह है दो रचनाओं के बीच कम से कम तीन-चार दिनों का अंतराल रखा करें ताकि हर रचना को उसका उचित समय और स्थान प्राप्त हो सके। साभार,

    tosi के द्वारा
    February 28, 2012

    जी बिलकुल वाहिद जी … धन्यवाद

yogi sarswat के द्वारा
February 27, 2012

एक तो आपका नाम बिलकुल अलग है , तोशी जी ! दूसरे आप बहुत मधुर भाव लिए हुए कविता लिखती हैं ! सुन्दर समन्वय ! ए! आख़िरी पेड़ बताओ साखों ने साथ छोड़ा पहले या पत्ते पहले जले थे आपकी लगातार पोस्ट ई हैं किन्तु पढने में अच्छी लगी ! मैं ज्यादा व्याकरण नहीं जानता किन्तु मन को आपकी कविता के भाव अच्छे लगे ! साधुवाद ! आपका सहयोग चाहता हूँ ! http://yogensaraswat.jagranjunction.com/2012/02/14

    tosi के द्वारा
    February 28, 2012

    धन्यवाद योगी जी

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
February 27, 2012

सुन्दर भाव. बधाई

    tosi के द्वारा
    February 28, 2012

    धन्यवाद सर जी …………आभार

tosi के द्वारा
February 28, 2012

जी बिलकुल


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