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"पराई "

Posted On: 15 Feb, 2012 में

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“पराई ”

चार-दिवारी के पर्दों में, छुप-छुपकर
पलती रही वो,चुप चलती रही वो
वजह- बेवजह, दादी की डाटों को सुनकर
बालपन में, छोटे-बड़े भाइयों पर
भुन भुनाती रही वो
दीदी की पायल,पैरों में पहन-पहन देखती
दादाजी की लाठी भी संभालती रही वो
बाबूजी की चौकी तो अक्सर बिछाई,
अम्मा के काम में भी हाथ बंटाती रही वो
भाइयों सी सुविधा उसे मुहैया न थी
स्कूल में फिर भी अव्वल आती रही वो
बाबा ! मैं कुछ बनना चाहती हूँ
कह,हर सर्टिफिकेट उनको थमाती रही वो
ज़िंदगी की इस आपाधापी में,
न जाने कब वो बड़ी हो गई
डिग्री पाते ही सपना मुस्कुरा उठा,
जिसको अबतक आँखों में सजाती रही वो
बहुत पढ़ ली अब ससुराल में पढ़ना
बाबा बोले, तो चुप सुन सपनों को
दफ़न कर मुसकुराती रही वो
आज समझी थी, शायद वो इसका मतलब
बेटी इनकी है तो भी, पराई क्यूँ कहलाती रही वो
जिनसे ज्यादा कभी भी किसी की
अपनी न हो सकेगी वो -2
जानते-बुझते उन्होने कर दी विदा
और मन ही मन छटपटाती रही वो …………… पूनम राणा “मनु “

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11 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

MAHIMA SHREE के द्वारा
February 20, 2012

पुनम जी , बड़ी सजाता से आप मन के भावो को व्यक्त करती है , हम बेटियों की यही कहानी है , पैर अब बेटियां माँ-बाप के करीब है , और बेटे पराये होने लगे है.. वक्त बदल रहा है….सुंदर रचना के लिए बधाई…इससे भी अच्छी और मार्मिक मुझे “पत्थर” रचना लगी….

    tosi के द्वारा
    February 21, 2012

    ध्न्यवाद महिमा जी ! आपकी प्रतिक्रिया के लिए आभार व्यक्त करती हु

अलीन के द्वारा
February 16, 2012

सादर नमस्कार! बेटी के दर्द को वयां करता सार्थक और सुन्दर रचना ….बधाई कृपया मेरी सच्ची प्रेम कहानी पर अपना बेशकीमती सुझाव और प्रतिक्रिया अवश्य दे… मेरी सदा-एक अधूरी परन्तु सच्ची प्रेम कहानी

akraktale के द्वारा
February 16, 2012

पूनम जी, बहुत ही मार्मिक रचना. फिरभी आशावादी रहें एक बेटी यदि पढ़ लिखकर विदा हुई है तो आगे इससे भी अच्छी स्थिति में बेटियाँ बिदा होंगी.बधाई.

    tosi के द्वारा
    February 16, 2012

    ध्न्यवाद akraktale ji ! आभारी हूँ आपकी

dineshaastik के द्वारा
February 16, 2012

आदरणीय पूनम जी, प्रथम रचना ही इतनी प्रभावशाली। बधाई……. कृपया इसी तरह मेरी रचना ”बेटी की पीड़ा” भी पढ़े- http://dineshaastik.jagranjunction.com/author/dineshaastik/

    tosi के द्वारा
    February 16, 2012

    नमस्कार दिनेश जी , धन्यवाद …. आपकी कविता मैंने पढ़ी है सचमुच अच्छी है खासकर वो सविधान के अधिकार वाली पंक्ति मन को छूती है ……… आपको भी बधाई

pushkar के द्वारा
February 15, 2012

बहुत बहुत बधाई पूनम जी !मंच पर अपने पहले पोस्ट के लिए! बहुत सुन्दर शब्दों की जादूगरी!आगे भी इसे कायम रखे यही हार्दिक कामना!

    tosi के द्वारा
    February 16, 2012

    धन्यवाद पुष्कर जी ! मेरा हौसला बढ़ाने के लिए शुक्रिया ….

shashibhushan1959 के द्वारा
February 15, 2012

आदरणीया पूनम जी, सादर ! बहुत मार्मिक संवेदनाओं को आपने शब्द दिए हैं. सुन्दर भावाभिव्यक्ति !

    tosi के द्वारा
    February 16, 2012

    धन्यवाद शशीभूषण जी !आभारी हूँ आपकी


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